रायबरेली। जिले को क्षय रोग मुक्त घोषित करने की मंशा के बीच लोगों के लिए सुकून भरी खबर है। पिछले छह माह में 4600 से अधिक मरीजों ने टीबी को मात दे दी है। दवा खाने के बाद कराई गई जांच में क्षय रोग की पुष्टि नहीं हुई। सालभर में जिले के 89 गांवों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। इसमें दो गांव ऐसे हैं, जहां पिछले तीन वर्ष में एक भी क्षय रोगी नहीं मिले।
7952 क्षय रोगियों के परिवार के 24,835 लोगों की भी जांच की गई। क्षय रोगियों का निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत करके उन्हें इलाज के दौरान पोषण के लिए प्रति माह 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। नियमित इलाज व एहतियात से टीबी की बीमारी निष्प्रभावी हो रही है। जिले में 9738 मरीजों में खाद्य सामग्री की पोटली का वितरण भी किया गया।
शासन के निर्देश पर डोर-टू डोर टीबी के संभावित मरीजों को खोजने का अभियान चलाया जा रहा है। हर दिन चार से पांच संदिग्ध मरीजों की पहचान कर एक्सरे व बलगम की जांच कराई जा रही है। टीबी का पता लगते ही इलाज शुरू कर दिया जाता है।
लक्षण दिखने पर न करें नजरअंदाज
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनुपम सिंह का कहना है कि टीबी गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। किसी व्यक्ति को दो हफ्ते से ज्यादा समय तक लगातार खांसी बनी रहती है, तो यह टीबी का शुरुआती संकेत हो सकता है। जब खांसी के साथ खून आने लगे, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज न करें।
यह फेफड़ों में संक्रमण के बढ़ने का संकेत है। सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ होना भी टीबी के आम लक्षणों में शामिल है। लगातार बुखार रहना, खासकर शाम के समय, शरीर में संक्रमण की मौजूदगी को दर्शाता है। रात में अत्यधिक पसीना आना भी टीबी का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
सामान्य खांसी और टीबी में अंतर
सामान्य खांसी कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, जबकि टीबी की खांसी लंबे समय तक रहती है।
टीबी में शरीर कमजोर होने लगता है और वजन तेजी से घटता है।
टीबी में खांसी के साथ खून या बलगम आ सकता है।