रायबरेली। जिले की 35 फीसदी गर्भवती महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं। अस्पतालों में करीब 37 हजार गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इसमें करीब 17 हजार महिलाओं में सामान्य से कम खून मिला। 3341 गर्भवतियों को हाईरिस्क प्रेगनेंसी में शामिल किया गया है। इनमें हीमोग्लोबिन का स्तर आठ डेसीलीटर से भी कम मिला है।
मातृ एवं शिशु मृत्युदर को कम करने के साथ ही गर्भवती की बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के लिए हर माह की नौ, 16 और 24 तारीख को सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की जांच होती है। प्रसव पूर्व जांच करके उन्हें समय पर उचित इलाज मुहैया कराने का प्रयास किया जाता है। जिससे प्रसव में समस्या न हो। अमूमन हीमोग्लोबिन का स्तर न्यूनतम 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर होना चाहिए, लेकिन जांच के दौरान गर्भवतियों में खून की कमी मिल रही है।
जिले में करबी 37 हजार महिलाओं की जांच में करीब 17 हजार में खून की कमी मिली है। सामान्य महिला के शरीर में 11 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर रक्त होता है। खून की कमी के कारण महिलाएं कुपोषण का शिकार हो रही हैं। ध्यान न देने पर नवजातों में भी इसका असर दिख रहा है।
सीएमओ डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि खून की कमी मिलने पर गर्भवतियों को दवाओं के साथ ही उन्हें पौष्टिक खाद्य पदार्थों के सेवन के लिए प्रेरित किया जाता है।
ऐसे दूर करें खून की कमी
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अंजली सिंह का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में उचित खानपान से गर्भावस्था में खून की कमी दूर हो सकती है। विटामिन सी की मात्रा बढ़ाने के लिए अनार व संतरे का सेवन करें। आयरन के लिए खजूर, अंजीर, अखरोट, किशमिश और बादाम खाएं। प्रोटीन के लिए दाल का सेवन बढ़ाएं। चुकंदर और गाजर के सेवन से खून की कमी दूर हो सकती है।
खून की कमी के लक्षण
थकान महसूस होना, चक्कर आना।
ठंड लगना, सांस लेने में दिक्कत होना।
चेहरा पीला पड़ना, सिर दर्द होना।
दिल की धड़कन तेज होना।
भूख में कमी व चिड़चिड़ापन।
ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होना।