रायबरेली। कोरोना वायरस से जंग को जिले की एकजुटता बुधवार को नजर आई। पीएम के 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद ही लोग घरों में कैद हो गए। सुबह से ही सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। विश्व के सबसे बड़े लॉकडाउन का गवाह जिले के 34 लाख बने हैं।
हालांकि कुछ लो सड़कों पर निकले, लेकिन जो बेकाम निकले उन्हे पुलिस वालों ने घर लौटा दिया। जरूरी काम के लिए निकले लोगों को ही गहन पूछताछ के बाद आगे जाने दिया गया। दवा किराना और सब्जियों की चिन्हित दुकानें ही खुलीं। तालाबंदी से लोगों को दिक्कतों का सामना तो करना पड़ा, लेकिन जान और भविष्य को लेकर जिले के लोग गंभीर दिख रहे हैं।
जनता कफ्र्यू सफल होने के बाद पिछले दो दिन तक बाजारों में अघोषित लॉकडाउन दिखा। गत मंगलवार की रात 21 दिन के लिए लॉकडाउन की घोषणा के बाद पूरे जिले में हलचल बढ़ गई। रात में ही तमाम लोगों ने रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने के लिए बाजारों में पहुंच गए।
उन्हें पुलिस व अन्य अधिकारियों ने समझाया के रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। उनके मोहल्ले में भी ही सारी सुविधाएं मुहैया होंगी। बुधवार की सुबह से ही लोग घरों में दुबक गए। सड़कों पर सन्नाटे के साथ ही पुलिस वाले ही नजर आए। इक्का-दुक्क लोग घरों से बाहर निकले, लेकिन उन्हें आगे जाने के लिए पुलिस को कारण बताना पड़ा। ज्यादातर लोगों को वापस लौटाया गया।
प्रशासन की ओर से जारी सूची में शामिल दूध, किराना, मेडिकल आदि की दुकानें ही खुलीं। हालांकि दुकानों पर किसी को ज्यादा देर रुकने नहीं दिया गया। सामान लेकर तुरंत घर जाने की सलाह दी गई। मॉल्स और शॉपिंग सेंटरों में ताले लटके हुए हैं। पान की गुमटियों को पुलिस ने बंद करवा दिया। यहां तक चाय की दुकानें तक बंद रहीं।
संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही सभी पार्कों व सार्वजनिक स्थानों को बंद किए जाने के बाद बुधवार को मार्किंग वॉक पर निकलने वाले लोग घरों में दिनचर्या शुरू की। किसी ने कमरे तो किसी ने अपने लॉन में मार्निग वॉक और व्यायाम किया। सुबह लोग रोजाना टहलने को भी निकलते थे, लेकिन बुधवार की सुबह कोई भी टहलने के बाद बाहर नहीं निकला।