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रायबरेली शहर में चलती मिली अवैध शस् त्र फैक्टरी

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रायबरेली। सदर कोतवाली पुलिस और स्वॉट टीम ने मंगलवार रात शहर के चंद्र नगर मोहल्ले में चल रही एक अवैध शस्त्र फैक्टरी पकड़ी।
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पुलिस ने यहां से हिस्ट्रीशीटर समेत पांच बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक मौके से भाग निकला। पकड़े गए तस्करों के पास से 21 असलहे बरामद हुए हैं।


पुलिस की मानें तो ये तस्कर तैयार असलहों को रायबरेली के अलावा लखनऊ, अमेठी, सुल्तानपुर समेत अन्य जिलों में बेचते थे। यह फैक्टरी अरसे से चल रही थी, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लग सकी।


एसपी सुनील कुमार सिंह बुधवार को पुलिस कार्यालय में बताया कि मुखबिर से सूचना मिली थी कि शहर के चंद्र नगर में अवैध रूप से शस्त्र बनाने की फैक्टरी चल रही है।
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इस पर कोतवाल अशोक सिंह, सर्विलांस सेल प्रभारी अमरेश कुमार त्रिपाठी, स्वाट टीम प्रभारी राकेश सिंह ने मंगलवार रात टीम के साथ छापा मारकर पांच बदमाशों को दबोच लिया।


पकड़े गए बदमाशों की पहचान शहर के चंद्र नगर निवासी प्रेमचंद्र वर्मा उर्फ टिल्लू, महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के पिंडारी खुर्द निवासी दिवाकर सिंह, सतीश कुमार उर्फ नान्हू, मिल एरिया थाना क्षेत्र के कोडरस बुजुर्ग निवासी राम समुझ और नसीराबाद थाना क्षेत्र के रानीपुर वटमऊ निवासी मुस्ताक के रूप में हुई है।


जबकि नसीराबाद थाना क्षेत्र के पूरे मदेपुर निवासी अमीन मौके से भाग निकला। पुलिस को यहां से 21 एक तमंचे मिले हैं। इसके अलावा असलहा बनाने के कई उपकरण व पांच सिलेंडर भी बरामद किए गए हैं।


पकड़ा गया बदमाश प्रेमचंद्र हिस्ट्रीशीटर है। इसी के घर पर यह अवैध धंधा चल रहा था। यहां पर बने असलहे रायबरेली के अलावा आसपास के जिलों में सप्लाई किए जाते थे।


एसपी ने बताया कि तस्कर प्रेमचंद्र वर्मा के खिलाफ चार, दिवाकर सिंह के खिलाफ तीन आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं। इन सभी के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की जाएगी।


पिता से सीखा असलहा बनाने का काम
पकड़े गए तस्कर प्रेमचंद्र वर्मा ने बताया कि उसके पिता शस्त्रों की दुकान में काम करते थे। उन्हीं से मैंने शस्त्र बनाने का काम सीखा।


एसपी ने बताया कि आरोपी प्रेमचंद्र कई बार जेल भी जा चुका है। बिहार में अवैध असलहे के एक मामले में उसे जेल जाना पड़ा था। 2007 में जेल से छूटने के बाद नसीराबाद निवासी अमीन से उसका संपर्क हुआ।
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इसके बाद शस्त्र बनाने का काम शुरू कर दिया। अमीन इस धंधे में उसका साझीदार है। जबकि मुस्ताक, दिवाकर, सतीश और राम समुझ तमंचे और कारतूस सप्लाई करते थे।


3500 रुपये में असलहा और 200 में बेचते थे कारतूस
एसपी ने बताया कि फैक्टरी में तैयार किए जाने वाले तमंचे महंगे दाम में बेचे जाते थे। तस्कर एक तमंचा 3500 रुपये में जबकि कारतूस 200 रुपये में बेचते थे।


पहले भी पकड़ी जा चुकी हैं अवैध फैक्टरी
एसपी ने बताया कि जुलाई 2018 में भी बछरावां पुलिस ने असलहा बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी। इसमें रमेश प्रजापति, शिव कुमार, चमन सोनकर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उन्होंने बताया कि 19 जनवरी 2018 को हरचंदपुर पुलिस ने भी एक ऐसी ही अवैध फैक्टरी पकड़ी थी। इसमें अंशू सिंह, सूरज सिंह को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। पुलिस की कार्रवाई के बावजूद बदमाश चोरी-छिपे अवैध असलहा बना रहे हैं।
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