गर्मी, धूप या फिर बरसात इन सबसे जूझते हुए हाड़तोड़ मेहनत कर बड़ी से बड़ी इमारत या फिर नहरों का जाल बिछाते हैं। जान की परवाह किए बिना दिन-रात मेहनत करके खून पसीना बहाने वाले इन श्रमिकों के हितों की रक्षा की प्रशासन को कोई फिक्र नहीं है।
सरकार की ओर से चलाई जा रही श्रमिक कल्याण हितकारी योजनाओं से इन्हें वंचित रखा जा रहा है। योजनाओं का प्रचार प्रसार न होने से श्रमिक योजनाओं से अंजान हैं। जिले में दो लाख से ज्यादा श्रमिकों के सापेक्ष महज 30 हजार श्रमिकों का ही पंजीयन हो सका है।
प्रदेश सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम 1996 चलाया जा रहा है। इसके तहत कार्यदायी संस्थाओं को अपने श्रमिकों का पंजीयन कराया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य श्रमिकों के साथ होने वाली दुर्घटना में परिवार को सहायता मुहैया कराना है।
यह जिम्मेदारी श्रम विभाग को सौंपी गई है। इसके बावजूद योजनाएं श्रमिकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। श्रम विभाग में लगभग एक दर्जन योजनाएं चल रही हैं। इस वित्तीय वर्ष में केवल चार योजनाओं का लाभ श्रमिकों को मिला। लापरवाही का आलम यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में दो माह शेष हैं।
लेकिन अभी तक बजट नहीं खर्च किया जा सका है। वर्ष 2015-16 में 96 लाख 27 हजार रुपया मिला। इसमें 53 लाख 67 हजार रुपया खर्च हुआ। वित्तीय वर्ष 2015-16 में 3500 श्रमिक पंजीकृत किए गए हैं। इनमें 567 को साइकिल वितरित की गई। 500 श्रमिकों को सौर ऊर्जा का लाभ दिया गया।
19 श्रमिकों को मेधावी छात्र पुरस्कार योजना का लाभ दिया गया। 203 लोगों को शिशु मातृत्व योजना का लाभ दिया गया। वहीं शिशु हितलाभ, मातृत्व हितलाभ, बालिका मदद योजना, अक्षमता पेंशन योजना, दुर्घटना सहायता योजना, पुत्री विवाह अनुदान योजना, मृत्यु एवं अंत्येष्टि सहायता योजना आदि का लाभ श्रमिकों को नहीं मिला है।
रायबरेली विकास प्राधिकरण की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन आज तक श्रमिकों के पंजीयन को लेकर कोई पहल नहीं की गई। इसी तरह जिले में सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण, जल निगम, जल संस्थान, नगर निगम, नगर पालिका टाऊन एरिया, आवास विकास परिाद, जिला परिषद समेत कई ऐसे विभाग हैं।
जहां पर काफी संख्या में श्रमिक किसी न किसी रूप में काम करते हैं। बावजूद इसके अभी तक श्रमिकों के पंजीयन के लिए कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। सहायक श्रमायुक्त अमित कुमार मिश्र ने बताया कि श्रम विभाग में चल रही योजनाओं का लाभ पात्र श्रमिकों को दिलाया जाता है।
विभाग में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए मनरेगा श्रमिकों को 50 दिन और अन्य श्रमिकों से 90 दिनों का काम करने का प्रमाण पत्र जरूरी है। जिले में करीब डेढ़ लाख मनरेगा श्रमिक हैं। इनमें 12 हजार श्रमिकों ने 50 दिन काम किया है। इनका भी पंजीकरण कराया जा रहा है। अब तक 30 हजार श्रमिकों का पंजीकरण हो सका है।