सूची को राज्य पोषण मिशन के वेब एप्लीकेशन कुपोषण का दर्पण पर अपलोड करने के लिए बच्चों के नाम की फीडिंग का काम हो रहा है।
खास बात यह कि जिले में कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर लिया गया है, लेकिन अब तक बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार नहीं हो सकी है।
सिर्फ गांव के लोगों को प्रेरित करके बच्चों को कुपोषण से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य पोषण मिशन के तहत सालभर से कुपोषण से ग्रसित बच्चों को सेहतमंद करने का प्रयास किया जा रहा है।
करीब एक हजार बच्चे पहले चरण में कुपोषित पाए गए थे। प्रदेश सरकार की मंशा पर जिले भर में अभियान चलाया गया तो कुपोषित बच्चों की संख्या में बड़ा इजाफा हो गया।
चार माह में 28,455 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं। इसके अलावा 84 हजार 883 बच्चे सामान्य रूप से कुपोषण के शिकार मिले हैं। मात्र साढे़ तीन लाख बच्चे सेहतमंद मिले हैं।
कुपोषित बच्चों के चिह्नीकरण का काम पूरा होने के बाद अब सूची को ऑनलाइन करने का काम शुरू हो गया है। बच्चों का पूरा डिटेल इंटरनेट पर उपलब्ध होगा।
किस तरह बच्चों को सेहतमंद किया गया, इस संबंध में भी पूरी जानकारी नेट पर मिलेगी। योजना के अनुसार अतिकुपोषित बच्चों को अस्पताल लाकर उनका इलाज कराया जाएगा।
उन्हें सेहतमंद बनाने के लिए हर तरह से प्रयास किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है। सिर्फ अधिकारी गांवों में पहुंचकर लोगों को बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि जिले में 28 हजार बच्चे अतिकुपोषित व 84 हजार से अधिक बच्चे कुपोषित हैं।
सूची की फीडिंग का काम लगभग पूरा हो गया है। शासन स्तर पर कुपोषित बच्चों को सेहतमंद बनाने की योजना बनाई जा रही है। निर्देश मिलने के बाद शत प्रतिशत बच्चों को सेहतमंद करने का काम किया जाएगा।