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बुलेट ट्रेन जैसी दौड़ेंगी रेल कोच फैक्टरी में बनी स्वचलित ट्रेन

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लालगंज (रायबरेली)। मॉडर्न रेल कोच कारखाने में बनाई जाने वाली सेल्फ प्रोपेल्ड (स्वचालित) ट्रेनें आने वाले दिनों में हवा से बातें करेंगी।
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इसे 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड तक दौड़ाया जा सकेगा। पहली खेप में बन रहे 500 डिब्बों में एसी और नॉन एसी दोनोें तरह के कोच होंगे।


मेट्रो और स्वचालित ट्रेन के लिए जारी टेंडरों में अन्य औपचारिकताओं के साथ ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी भी एक प्रमुख शर्त है। जो कंपनी इन डिब्बों की निर्माण की प्रक्रिया से जुड़ेगी, उसे कारखाने को अपनी तकनीक भी साझा करनी होगी।


रेल कोच फैक्टरी में जीएम पद पर तैनात रहे व रेलवे बोर्ड में मेंबर रोलिंग स्टाक पद पर काम कर रहे राजेश अग्रवाल अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित रेलगाड़ियों को बनाने की दिशा में कदम उठाया था।
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अब उसी दिशा में कोच फैक्टरी ने बुलेट ट्रेन, मेट्रो ट्रेन और स्वचालित ट्रेनों के डिब्बे बनाने के लिए औपचारिकताएं शुरू कर दी हैं। हाल ही में जारी हुए टेंडरों के मुताबिक स्वचालित ट्रेनों के 232 नॉन एसी डीपीआरएस (डिस्ट्रीव्यूटेड पॉवर रोलिंग स्टॉक) डिब्बे बनेंगे।
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इन्हें 120 किमी. प्रतिघंटे की स्पीड पर चलाया जा सकेगा। वहीं 264 एसी डिब्बे बनेंगे, जिन्हें 160 किमी प्रतिघंटे की स्पीड तक चलाया जा सकेगा।


सूत्रों की माने तो इन्हीं डिब्बों की स्पीड 200 किमी प्रतिघंटे तक बढ़ाई जा सकेगी। इसी प्रकार 80 किमी. प्रति घंटे की स्पीड वाली मेट्रो ट्रेन के 24 कोच व 80 किमी. प्रति घंटे की स्पीड वाले 18 कोच बनाने की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। इन डिब्बों के निर्माण से जुड़ने वाली कंपनियों से टेक्नोलॉजी भी ली जाएगी। 2021 तक ये कोच बनकर निकलेंगे।
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