रायबरेली। कांग्रेस के हाईकमानों और सूरमाओं की कर्मभूमि और कांग्रेसियों का गढ़ कहे जाने वाले रायबरेली में बतौर प्रधानमंत्री पहली बार यहां आए नरेंद्र मोदी ने इस जिले के ऐतिहासिक, राजनीतिक, साहित्यिक महत्व का खाका खींचा। लगभग 50 मिनट के अपने भाषण के शुरुआती 10 मिनट में उन्होंने इतिहास के पन्नो को पलटते हुए जिले की गौरवगाथा की याद दिलाई और इसके माध्यम से हर वर्ग को समेटने की कोशिश की। उन्होंने भाजपा सरकार की सबका साथ सबका विकास के संकल्प को साकार करने की दिशा में हर वर्ग के दिलों को छूने का प्रयास किया और वादा किया कि उन्होंने जो भी योजनाएं शुरू की हैं, उनका लाभ हर तबके को मिल रहा है।
पीएम मोदी ने जोशीले अंदाज में उमड़ी भीड़ के अभिवादन को स्वीकार किया और इस जिले की माटी के महत्व को दर्शाने का काम किया। उन्होंने कहा कि रायबरेली की भूमि ने आध्यात्मिक से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन और साहित्य से लेकर राजनीति में भी दिशा दिखाई है। यह अनेक ऋषि-मुनियों के तप की भूमि है। यह राणा बेनी माधव बख्श सिंह और वीरा पासी के बलिदान की भूमि है। उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में इस जिले के दोनों बड़े नाम मलिक मोहम्मद जायसी और आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नामों का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने जायसी के अपनत्व की याद दिलाई तो द्विवेदी की रचनाओं के महत्व का भी बखान किया।
रायबरेली जिले के किसान आंदोलन को भी पीएम मोदी ने अपने भाषण का हिस्सा बनाया और इस आंदोलन के प्रणेता पं. आमोल शर्मा का नाम लेना भी नहीं भूले। राजनीति के क्षेत्र की बात याद आई तो कांग्रेस पर बरसने वाले पीएम ने 1977 के चुनाव में इंदिरा गांधी को शिकस्त देने वाले राजनारायण का नाम लिया। उन्होंने कहा कि इस जिले ने राजनारायण को भी आशीर्वाद दिया है।
बता दें कि 1967, 1971 और 1980 में यहां से चुनाव जीती इंदिरा गांधी को 1977 में राजनारायण ने लगभग 55 हजार वोटों से पराजित किया था। विपक्षी पार्टियों को यह चुनाव कभी नहीं भूलता है और हर बार रायबरेली में 1977 का इतिहास दोहराने की बात करते हैं। पीएम मोदी ने रायबरेली के इतिहास को गौरवशाली बताया। पीएम के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सबका साथ सबका विकास की बात कही और हर वर्ग को जोड़ने की कोशिश की।