रायबरेली। परशदेपुर में 15 साल पहले शिव बरात के दौरान हुए उपद्रव के मामले में शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित पथ द्वितीय पल्लवी प्रकाश के कोर्ट ने 21 आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया है।
बसपा शासनकाल में 21 मार्च 2010 को शिव बरात निकालने के दौरान परशदेपुर कस्बा उपद्रव की चपेट में आ गया था। शिव बरात जैसे ही मुस्लिम बाहुल मोहल्ला अंसार चौक पर पहुंची थी, उस पर छतों से पथराव होने लगा था। इस उपद्रव में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। आगजनी और तोड़फोड़ में लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। इस मामले में पुलिस की तरफ से 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें आरोपी बनाया गया था।
आरोपियों में बद्री प्रसाद, नीरज ज्ञानचंद्र, सुशील कुमार, मुन्ना यादव, राजकुमार मौर्या, सूरजपाल सिंह, परवेश कुमार, पंकज कुमार, सुरेंद्र कुमार यादव, अनिल सिंह, चंदन कुमार, अनिल कुमार उर्फ रामू, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, मो. अनीस, मो. शकील, मो. अतीक, रमेश वैश्य, महेश तेली साहू, राजू वैश्य, मो. इस्लाम पर दंगा भड़काने व तोड़फोड़ करने सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।
शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश त्वरित पथ द्वितीय के कोर्ट ने साक्ष्य व गवाही के आधार पर सभी 21 आरोपियों को दोषमुक्त किए जाने का आदेश दिया। इसमें कहा गया कि आरोपियों के पूर्व में दाखिल किए गए जमानतदारों के निजी बंधपत्र भी निरस्त किए जाते हैं।