रायबरेली। एक ग्रामीण की सूझबूझ से शनिवार को एक बड़ा रेल हादसा होने से बच गया। रायबरेली-डलमऊ रेल लाइन पर पटरी टूटी देख उमेश चंद्र अवस्थी ने बिना समय गंवाए सरपत जलाकर धुआं किया।
इसके बाद लाल कपड़ा दिखाकर उसी ट्रैक से गुजर रही रायबरेली-कानपुर पैसेंजर को रोक दिया। काफी रफ्तार में चल रही यह गाड़ी टूटे ट्रैक के पास ही रुक गई।
करीब डेढ़ घंटे तक गाड़ी बीच रास्ते में खड़ी रही और यात्री आसपास टहलते रहे। बाद में धीमी रफ्तार से ट्रेन को निकाला जा सका और गंतव्य के लिए रवाना किया गया।
नसीरपुर निवासी उमेश चंद्र अवस्थी ने सुबह लगभग 7 बजे सबसे पहले ट्रैक टूटा देखा तो उसके होश उड़ गए। उमेश ने बताया कि कानपुर पैसेंजर ट्रेन आती दिखी तो तुरंत आसपास से सरपत जुटाया और उसमें आग लगा दी, जिससे धुआं उठने लगा।
बाद में दौड़कर घर से लाल कपड़ा लाकर लहराया, तब तक गाड़ी काफी नजदीक आ चुकी थी। लोको पायलट बीके यादव को पहले तो कुछ समझ में न आया, लेकिन लाल कपड़ा दिखाए जाने पर खतरे का अंदेशा हुआ तो इमरजेंसी ब्रेक लगा दी और गाड़ी रुक गई।
इस ट्रेन के पहले ही इसी टूटे ट्रैक से सुबह करीब साढ़े छह बजे रायबरेली-डलमऊ-रघुराज सिंह पैसेंजर भी गुजर चुकी थी।
बताया जा रहा है कि डलमऊ रेलवे स्टेशन से पहले राधा बालमपुर हॉल्ट पड़ता है, जहां से सुबह लगभग 7.20 बजे गाड़ी संख्या 54211 रायबरेली-कानपुर पैसेंजर छूटी तो कुछ दूर जाने के बाद ही नसीरपुर गांव के पास अचानक उसे रोक दिया गया।
ट्रैक टूटा होने की जानकारी गार्ड अजय कुमार ने डलमऊ स्टेशन को दी, जिससे तुरंत गैंगमैन और लाइनमैन को भेजा गया।
करीब डेढ़ घंटे तक नसीरपुर गांव में खड़ी रही पैसेंजर ट्रेन को धीमी रफ्तार से टूटे ट्रैक पर ही चलाया गया और यह गाड़ी सुबह 9.03 बजे डलमऊ पहुंची।
इसके बाद ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों ने राहत की सांस ली। जितनी देर नसीरपुर में गाड़ी खड़ी रही, आसपास के ग्रामीणों का भी मजमा लगा रहा।
डलमऊ के स्टेशन अधीक्षक सियाराम रावत ने बताया कि गार्ड ने किमी संख्या 6/3 एवं 6/4 के बीच रेलवे लाइन चटकी होने की जानकारी दी है।
ट्रैक की मरम्मत के लिए टीम लगा दी गई है। जब तक ट्रैक दुरुस्त नहीं हो जाता है, तब तक कॉसन लगा दिया गया है। इस रेल लाइन पर तीन जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों का ही संचालन नियमित रूप से होता है। कभी-कभी मालगाड़ी निकलती रहती हैं। इससे ट्रेनों के संचालन में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।