इस्लाम में एखलाक का बहुत बड़ा किरदार
रायबरेली। एदारा-ए-शरैया की तरफ से जश्न-ए-आमद-ए-मुस्तफा (स.अ.) का सातवां जलसा रविवार रात अंदरून किला में आयोजित हुआ। हाफिज फरीद अहमद ने कुरआन की तिलावत की। मौलाना मंसूर अहमद एवं मौलवी शाकिब ने नात पेश की। मुख्य वक्ता मुफ्ती शेर मोहम्मद (लखनऊ) ने कहा कि इस्लाम में एखलाक का बहुत बड़ा किरदार है। आज मजहब-ए-इस्लाम पर इल्जाम लगाया जाता है कि इस्लाम तलवार की जोर पर फैला है, जबकि हकीकत यह है कि इस्लाम हमारे नबी (स.अ.) के एखलाक व किरदार की बुनियाद पर फैला है।
उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल (स.अ.) की पूरी जाहिरी जिंदगी एखलाक और अच्छे बर्ताव का बेहतरीन नमूना है, जिसको देखकर लोग इस्लाम से करीब होते गए। हमारे नबी (स.अ.) का एखलाक यह था कि एक बूढ़ी औरत आपके रास्ते में हमेशा कांटे बिछाया करती थी। एक दिन वह बीमार हुई तो नबी (स.अ.) उसकी अयादत (तीमारदारी) के लिए बूढ़ी औरत के घर गए। हमारे नबी (स.अ.) ने फरमाया है, जो खुद खाओ वह अपने पड़ोसियों को भी खिलाओ। अगर उतना खाना नहीं है तो अपने बच्चों को घर में छुपाकर खिलाओ, ताकि तुम्हारे पड़ोसी को तकलीफ न पहुंचे। हमारे नबी (स.अ.) का इसी एखलाक और किरदार का पैगाम था, जिसकी बुनियाद पर एक सदी के अंदर इस्लाम पूरी दुनिया में फैल गया। मौलाना ने कहा कि मुसलमानों को चाहिए कि हम अपने नबी (स.अ.) के एखलाक और किरदार पर अमल करें, ताकि इस्लाम की सच्ची तस्वीर जमाने पर जाहिर हो जाए। जलसे की अध्यक्षता मौलाना अरबीउल अशरफ और संचालन मौलाना नासिर खां ने किया। सलातो सलाम व दुआ पर जलसे का समापन हुआ। इस मौके पर मो. शादाब खां, मो. मुमताज खां, मौलाना खलील अहमद, मौलाना राहत हुसैन, मौलाना इजहार खान आदि मौजूद रहे।