रायबरेली। मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में मंगलवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव से पहले रायबरेली में सियासी पारा चढ़ गया। सोमवार को पुलिस ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष समेत 18 पदाधिकारियों को उनके घरों में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर लिया। पुलिस की इस कार्रवाई से नाराज कांग्रेसी दोपहर एक बजे कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी।
कांग्रेसियों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन सरकार के इशारे पर उनका उत्पीड़न कर रहा है। जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी ने बताया कि उन्हें लखनऊ जाने से रोकने के लिए घरों पर पुलिस तैनात कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराजगंज पुलिस ने कांग्रेसी नेता सुशील पासी के साथ अभद्र व्यवहार किया, जिसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। धरने पर बैठे नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार मनरेगा का नाम बदलकर इसे समाप्त करने का षड्यंत्र रच रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी। दोपहर से चल रहा यह हंगामा शाम छह बजे तक जारी रहा। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट राम औतार और सदर कोतवाली प्रभारी शिवशंकर सिंह ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कांग्रेसियों से वार्ता की। प्रशासन द्वारा लखनऊ जाने से न रोकने का आश्वासन मिलने के बाद ही कांग्रेसियों ने अपना धरना समाप्त किया।
इन्हें किया गया हाउस अरेस्ट
कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज तिवारी के साथ-साथ सुशील पासी, गिरीश बहादुर सिंह, शाजू नकवी, डॉ. मनीष, ओमप्रकाश त्रिपाठी, सुरेंद्र लोधी, मो. अशरफ, अखिलेश अवस्थी, छोटेलाल पासी और नीरज शुक्ला समेत 18 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने उनके आवासों पर नजरबंद कर दिया है। पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है।
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अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी) संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से कांग्रेस पदाधिकारियों को हाउस अरेस्ट किया गया है। किसी भी कार्यकर्ता के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया गया है। किसी को शांति व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कानून का पालन करने और पुलिस प्रशासन का सहयोग करने की अपील भी की।