प्रसव के दौरान प्रसूताओं की मौत में कमी लाने के लिए 1,711 प्रसूताओं पर स्वास्थ्य महकमा खास निगरानी करेगा। मातृत्व सप्ताह के दौरान ये प्रसूताएं गंभीर (हाई रिस्क प्रेगनेंसी) मिलीं।
इन महिलाओं की रूटीन जांच व इलाज कराकर उन्हें स्वस्थ किया जाएगा। जिससे प्रसव के दौरान कोई समस्या न आए। जिले में 27,680 चिह्नित प्रसूताओं में 23,507 की जांच की गई।
जिले में 27 जनवरी से 3 फरवरी तक मातृत्व सप्ताह चलाया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांवों में पहुंचकर प्रसूताओं की जांच की।
जिले में 27,680 प्रसूताओं को सप्ताह के दौरान जांच के लिए चिह्नित किया गया। जिसमें 23,507 प्रसूताओं की जांच की गई। इसमें 1,711 प्रसूताएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की मिलीं।
गंभीर मिलीं प्रसूताओं की 5 फरवरी से सीएचसी व जिला अस्पताल लाकर उनकी जांच व इलाज कराया जाएगा। इसके अलावा एएनएम व आशा बहू इन प्रसूताओं पर निगरानी रखेंगी।
उन्होंने स्वस्थ रहने के बारे में बताएंगी। उनके खानपान पर ध्यान रखेंगी। जब तक हाई रिस्क प्रेगनेंसी की प्रसूताओं को प्रसव नहीं होता, तब तक उनका ख्याल रखा जाएगा।
इसके लिए सभी एएनएम और आशा बहुओं को निर्देशित किया गया है। उनकी रूटीन जांच सीएचसी पर लाकर कराएंगी। माह में कम से कम एक बार महिला चिकित्सक को दिखाकर सलाह लेंगी।
सीएमओ डॉ. राकेश कुमार यादव ने बताया कि मातृत्व सप्ताह में जिले में 23 हजार से अधिक प्रसूताओं के घर टीमें भेजकर उनकी जांच कराई गई। 1711 प्रसूताएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी (रेड प्वाइंट) की मिलीं।
इन प्रसूताओं को सीएचसी व जिला अस्पताल लाकर उनका इलाज कराया जाएगा। प्रसव तक रूटीन जांच कराई जाएगी।