फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

12 दिन में 17 नवजातों की मौत

विज्ञापन
विज्ञापन
रायबरेली। जिले के सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव और इलाज में बरती जा रही मनमानी नवजातों पर कहर बरपा रही है। इलाज के नाम पर खानापूरी किए जाने पर जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 12 दिनों में भर्ती कराए गए 17 नवजातों की मौत हो गई। बुखार व खून की कमी समेत अन्य समस्याओं से नवजात ग्रसित थे। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती दो नवजात ने शुक्रवार को दम तोड़ दिया।
विज्ञापन

प्रदेश सरकार शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। इसके बाद भी उसकी मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में शुक्रवार को भर्ती कराए गए दो नवजातों की मौत हो गई। इन दोनों मौतों को लेकर पिछले 12 दिन में 17 नवजात दम तोड़ चुकें हैं। एक-एक करके कई नवजातों की मौत के बाद भी बच्चा वार्ड में इलाज के नाम पर खानापूरी की जा रही है।
बच्चा वार्ड पूरी तरह से फुल है। ताबड़तोड़ मौतों की जानकारी होने के बाद भी इस पर काबू पाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अब तक गंभीर नहीं हुए हैं। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती बछरावां क्षेत्र के गल्लामंडी निवासी ज्योति साहू के नवजात व शिवगढ़ ब्लॉक के मोहनगंज की रहने वाली आरती के नवजात की मौत शुक्रवार को हो गई।
विज्ञापन

इसके अलावा भदोखर क्षेत्र के पूरे भवन शाह निवासी उर्मिला, सरेनी ब्लॉक के बरजोरखेड़ा निवासी संगीता देवी, लालगंज क्षेत्र के बलीपुर निवासी सीता, महराजगंज क्षेत्र के जिहवा निवासी आरती, गदागंज क्षेत्र के हजरतपुर निवासी रीना, सलोन क्षेत्र के सेंधियापुर निवासी पूनम, फुरसतगंज क्षेत्र के लालपुरवा निवासी रहीसुनिंशा, भदोखर क्षेत्र के सूरजकुंडा निवासी सरोजनी के दो नवजात, शिवगढ़ क्षेत्र के पाराकला निवासी मधू, लालगंज निवासी नीतू, बछरावां के अंकुरखेड़ा निवासी सोनी, प्रतापगढ़ जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के ब्रम्हरौली निवासी चंद्रमा, महराजगंज क्षेत्र के बावन बुजुर्ग बल्ला निवासी फूलमती और ऊंचाहार क्षेत्र के चडऱई निवासी शोभा के नवजात की इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रसव के बाद नवजातों को हालत नाजुक होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जिला महिला अस्पताल में नवजातों के इलाज के लिए सिक न्यू बॉर्न यूनिट (एसएनसीयू) स्थापित किया गया है। गंभीर नवजातों को यहां भर्ती करके इलाज करने की व्यवस्था है। इसके अलावा महिला अस्पताल के साथ ही जिले की सीएचसी में कंगारू मदर केयर (केएमसी) यूनिटों की भी स्थापना की गई है। इसके बाद भी जिले में 12 दिन में 17 नवजातों ने दम तोड़ दिया। इससे स्वास्थ्य विभाग की करोड़ों की लागत से संचालित यूनिटों की कार्यशैली की पोल खुल रही है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव ने बताया कि नवजातों की मौत की जानकारी हुई है। पूरी रिपोर्ट लेकर नवजातों की मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। इसकी समीक्षा की जाएगी। एसएनसीयू में जगह न होने के कारण बच्चा वार्ड में नवजातों को भर्ती कराया गया था। नवजातों व अन्य भर्ती बच्चों को अच्छे से अच्छा इलाज देने का प्रयास किया जाता है।
12 दिन में 17 नवजातों की मौत हुई है तो बड़ी बात है। इस संबंध में सीएमएस से पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। जिस भी स्तर से इलाज में लापरवाही बरती गई है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। शिशु मृत्युदर को कम करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।- डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें