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राजनीति के पेंच में फिर फंसा एम्स का भविष्य

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960 के बजाय 600 बेड का ही होगा एम्स
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रायबरेली। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में एम्स निर्माण का काम तो शुरू हुआ, लेकिन इसका भविष्य एक बार फिर राजनीतिक दांवपेंच में फंसता नजर आ रहा है। एम्स की ओपीडी बनकर तैयार है, लेकिन शुभारंभ न होने से जनता को यहां इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व इसके शुभारंभ की कवायद तेज जरूर हुई थी, लेकिन आखिरी दौर में मामला लटक गया। इस बीच केंद्र सरकार ने एक और झटका दिया है। अब एम्स 960 बेड के बजाय महज 600 बेड का होगा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो निर्माण का बजट भी नहीं बढ़ाया जाएगा। अबतक की खींचतान को देखकर एम्स के जल्द शुरू होने की उम्मीद भी धूमिल होने लगी है।
वर्ष 2009 में रायबरेली में एम्स के निर्माण को मंजूरी मिली थी। इसका बजट 823 करोड़ रुपये रखा गया था। इसका ऐलान तो कर दिया गया, लेकिन निर्माण के लिए जमीन की तलाश को लेकर काफी मशक्कत करनी पड़ी। एम्स की जमीन को लेकर काफी हो हल्ला हुआ था। जमीन के लिए दरियापुर स्थित नंदगंज शिहोरी चीनी मिल और लालगंज क्षेत्र में जमीन चिह्नित हुई थी। भूमि के लिए तत्कालीन राज्य सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने दरियापुर स्थित चीनी मिल की भूमि पर एम्स बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद एम्स का निर्माण तो शुरू हुआ, लेकिन इसमें तेजी नहीं आई। आठ साल से ज्यादा का समय बीत गया, लेकिन इसके जल्दी बनकर तैयार होने की उम्मीद नहीं दिख रही।
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ओपीडी तो वर्ष 2014 में ही बनकर तैयार हो गई थी। लोकसभा चुनाव से पहले यहां इमरजेंसी के शुभारंभ को लेकर कवायद शुरू की गई, लेकिन बाद में यह कार्य भी मुकाम तक नहीं पहुंच सका। कई साल बीत गए, लेकिन ओपीडी का शुभारंभ आजतक नहीं हुआ। इसका खामियाजा तो प्रदेश की जनता को ही भुगतना पड़ रहा है।

145 एकड़ में एम्स बनाने का है प्रस्ताव
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक 145 एकड़ से अधिक एरिया में एम्स बनाए जाने का प्रस्ताव है। इसमें 97 एकड़ जमीन दरियापुर स्थित नंदगंज सिहोरी चीनी मिल की है। इसके अलावा सुल्तानपुर आइमा, मधुपुरी, दरियापुर, गढ़ी मुतवल्ली के किसानों की 48.54 एकड़ भूमि अधिगृहीत की जानी है। जमीन के बदले किसानों को मुआवजा भी दिया जाना है।

4101 होगी एम्स स्टाफ की संख्या
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक एम्स में 4101 लोगों का स्टाफ होगा। इसमें 39 सुपर स्पेेशलिस्ट चिकित्सक होंगे। कुल 52 डिपार्टमेंट होंगे। हर तरह का इलाज हो सकेगा। ओपीडी में हर तरह के रोगियों को देखा जाएगा।

2013 में मिली थी जमीन
अफसरों की मानें तो 23 जुलाई 2013 को भूमि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के नाम की गई थी। केंद्र सरकार की ओर से टेंडर सहित अन्य सभी प्रकार की औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई थी।

नक्शा पास करने में भी देरी
दरियापुर चीनी मिल की जमीन पर बनने वाले एम्स के भवन का नक्शा पास करने में भी लेटलतीफी हुई। रायबरेली विकास प्राधिकरण ने समय से नक्शा पास नहीं किया था। बिना नक्शा पास हुए एम्स के भवन का निर्माण शुरू होना संभव ही नहीं था।
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दूसरे चरण में बनेगा मेडिकल कॉलेज
सीएमओ डॉ. डीके सिंह का कहना है कि भारत सरकार की देखरेख में एम्स का निर्माण कराया जा रहा है। फिलहाल यहां पहले फेज का कार्य पूरा हो गया है। इसमें हॉस्टल-आवास बन गए हैं। दूसरे फेज में मेडिकल कॉलेज बनाया जाना है। एम्स की ओपीडी शुरू कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
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