बारिश से जिले की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी
सीन एक : जलभराव से स्कूल जाना मुश्किल
शिवगढ़ ब्लॉक क्षेत्र के संयुक्त रूप से पूर्व माध्यमिक और प्राथमिक स्कूल जड़ावगंज और संयुक्त रूप से पूर्व माध्यमिक और प्राथमिक स्कूल सरांय क्षत्रधारी पानी से लबालब भरा है। पानी इस कदर भरा है कि स्कूल के अंदर जाना मुश्किल है। छतों से पानी टपक रहा है। बच्चों की संख्या 20 फीसदी से भी कम थी। स्कूलों में तैनात शिक्षक तो पहुंचे, लेकिन पढ़ाई व्यवस्था चौपट रही।
सीन दो : ठप हो गया पठन-पाठन कार्य
महराजगंज ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल कोटवा मदनिया में जलभराव हो गया है। इससे बच्चों को स्कूल आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जलभराव की वजह से बच्चों की संख्या 20 फीसदी से भी कम हो गई है। सिर्फ शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं। पठन-पाठन का कार्य ठप हो गया है।
सीन तीन : स्कूल नहीं आ रहे बच्चे
अमावां ब्लॉक क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक स्कूल पहरेमऊ परिसर में पानी भरा है। इससे अधिकतर बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। शिक्षक-शिक्षिकाएं ही स्कूल पहुंच रहे हैं। पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की जा रही है। इसी तरह राही ब्लॉक क्षेत्र के जफरापुर, सुलखियापुर, मुंशीगंज स्थित प्राथमिक स्कूलों में जलभराव हो गया है। इससे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई है।
रायबरेली। ये तीन केस बताने के लिए काफी हैं कि बारिश ने नए शिक्षासत्र की पढ़ाई व्यवस्था को चौपट कर दिया है। स्कूल पानी से लबालब भरे हैं। छतें दरक गई हैं। इससे इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों पर हर पल खतरा मंडरा रहा है। बच्चों की संख्या कम हो गई है।
जिले में सरकारी स्कूलों की संख्या 2600 है। इसमें सवा दो लाख बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इधर, कई दिन से हो रही बारिश से पढ़ाई व्यवस्था बेपटरी है। खास बात ये है कि बारिश से निपटने के लिए शिक्षा विभाग के अफसरों की ओर से कोई कदम नहीं उठाया। जर्जर स्कूलों की मरम्मत नहीं कराई गई। नतीजतन बारिश में छत से पानी टपकता है। इससे बच्चों की किताबों व स्कूल के दस्तावेज भीग जाते हैं। यदि पानी बारिश इसी तरह होती रही तो यह माह बिना पढ़ाई के ही बीत जाएगा। पानी निकासी को लेकर अफसर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जिले के जिन स्कूलों में जलभराव की समस्या है, उन्हें चिह्नित कराकर इसे दूर कराया जाएगा। खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्कूलों के जिन कक्षों से पानी टपकता है, बच्चों को उसमें कतई न बैठाएं। उन्हें दूसरे कक्षों में बैठाकर पठन-पाठन कराएं।- संजय कुमार शुक्ला, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी