शासन ने मनरेगा में काम न करने वाले ग्राम रोजगार सेवकों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए हैं, लेकिन प्रधानों की मनमानी के कारण आदेश ठेंगे पर है।
ग्राम रोजगार सेवकों की नियुक्ति ग्राम पंचायत के स्तर से होती है, इसलिए उन्हें हटाने का अधिकार प्रधान को ही है। आदेश के बाद भी सरेनी के 15 प्रधानों ने रोजगार सेवकों की सेवाएं समाप्त नहीं की है।
मनमानी करने वाले प्रधानों के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस संबंध में डीपीआरओ ने प्रधानों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब देने के आदेश दिए हैं।
मनरेगा में खराब प्रगति वाली ग्राम पंचायतों ने रोजगार सेवकों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश दिए गए थे। इसके बाद भी सरेनी के 15 प्रधानों ने आदेश का पालन नहीं किया।
डीएम की ओर से भी उन्हें आदेश दिया गया, लेकिन प्रधानों ने मनमानी की। डीएम के निर्देश पर प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। उन्हें 15 दिन का समय दिया गया है।
ग्राम रोजगार सेवकों की सेवाएं समाप्त न करने पर प्रधानों के अधिकारों को सीज करने की चेतावनी दी गई है। डीपीआरओ डॉ. संजय यादव ने बताया कि आदेशों के बाद भी प्रधानों ने कार्रवाई नहीं की है।
मनरेगा में मनमानी करने वाले ग्राम रोजगार सेेवकों की सेवाएं समाप्त करनी थी, ऐसा न करने वाले प्रधानों को नोटिस दिया गया है। उनके अधिकार सीज किए जाएंगे।