डलमऊ (रायबरेली)। शिक्षा एक ऐसा हथियार है, जिससे सभी मुश्किलों का मुकाबला किया जा सकता है। ज्ञान ऐसी चाभी है, जिससे सभी ताले खोले जा सकते हैं। तालीम की बदौलत न सिर्फ अपनी तरक्की की जा सकती है, बल्कि पूरे परिवार की गाड़ी चलती है। आज के दौर में बालकों के साथ बालिकाओं को भी बराबर तालीम देनी चाहिए। बेहतर शिक्षा हासिल कर महिलाएं तरक्की के रास्ते पर चलें।
समाज के हर क्षेत्र में महिलाओं ने पुरुषों की तरह अपनी सफलता के परचम फहराए हैं। ये बातें शुक्रवार को डलमऊ तहसील क्षेत्र के राजीव गांधी स्मारक हाईस्कूल कुटिया चौराहा भरसना में अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत हुई परिचर्चा में उभरकर सामने आईं।
महिला शिक्षा पर हुई इस परिचर्चा में प्रबंधक संजय सिंह, शिक्षिका शालिनी सिंह, सुधा सिंह, पूनम, सरिता और छात्र-छात्राओं ने नारी सम्मान की शपथ लेते हुए अमर उजाला की पहल की सराहना भी की।
शिक्षित हो जागरूक बनें
महिलाएं शिक्षित होकर जागरूक बनें और पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों का खुलकर मुकाबला करें और अधिकारों को पाने के लिए संघर्ष करें।
-संजय सिंह, प्रबंधक
हर क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी
कुरीतियों के चलते महिलाओं पर अत्याचार और उत्पीड़न बहुत अधिक होता था। शिक्षा हासिल करने के बाद महिलाएं जागरूक हुईं तो इसमें कमी आई। साथ ही हर क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ी है।
-शालिनी सिंह, शिक्षिका
इनसेट
खुद जागरूक हों और दूसरों को भी प्रेरित करें
महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों, जिसके लिए शिक्षित होना जरूरी है। जागरूक महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी जगाने का काम करें, उन्हें प्रेरित करें। इस महिलाओं की दशा और दिशा में सुधार आएगा।
-सुधा सिंह, शिक्षिका
बालकों की तरह बालिकाओं को भी मिले शिक्षा
शिक्षा के मामले में बालक और बालिका में कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए। जिस तरह बेटों को पढ़ने का हक है, उसी तरह बेटियों को भी पढ़ाना चाहिए। कई क्षेत्रों में तो बेटियों ने बेटों को पीछे कर दिया है।
-पूनम, शिक्षिका
कंधे से कंधा मिलाकर चल रहीं महिलाएं
जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। राजनीति हो या फिर समाजसेवा, खेलकूद हो या फिर चिकित्सा, सभी में महिलाओं ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।
-सरिता, शिक्षिका
महिलाओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए। यह सम्मान तभी मिल सकेगा, जब हम शिक्षित होंगे।
-साक्षी दीक्षित, छात्रा
जरूरी नहीं कि पढ़ाई से सिर्फ नौकरी ही हासिल की जाए। अच्छी पढ़ाई करके खेलकूद में भी नाम कमाया जा सकता है।
-नेहा पाल, छात्रा
माता-पिता को कभी भी यह नहीं समझना चाहिए कि बेटियां पराया धन हैं। बेटियां तो दो घरों को रोशन करती हैं।
-चेतनी, छात्रा
बेटियों ने हर क्षेत्र में आसमान छुआ है। अपने ही जिले की सुधा सिंह समेत कई नाम जीवंत उदाहरण हैं।
-आशनी, छात्रा
बेटियां भी किसी से कम नहीं हैं, जरूरत है उन्हें अच्छी शिक्षा देने और बेहतर मार्गदर्शन और सहयोग की।
-आंचल सिंह, छात्रा
बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं समझना चाहिए। बेटों की तरह बेटियों को भी अच्छी शिक्षा मिले तो वे भी परिवार का नाम रोशन कर सकती हैं।
-शिल्पी मिश्रा, छात्रा
छात्राओं को कभी भी डरने की जरूरत नहीं है। अगर कभी मुश्किल आए तो उन्हें अपने हक के लिए लड़ना चाहिए।
-प्रियंका, छात्रा
बालिकाओं के साथ अक्सर मुश्किलें आ जाती हैं। घर के बाहर होने वाली घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस की मदद लेनी चाहिए।
-स्नेह लता, छात्रा
बेटियों को भी अच्छी शिक्षा मिले तो वे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अफसर बनकर परिवार का नाम रोशन कर सकती हैं।
-वर्षिका सिंह, छात्रा
शिक्षा हर किसी का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसलिए बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं करना चाहिए, बल्कि बराबर शिक्षा देनी चाहिए।
-कोमल द्विवेदी, छात्रा