डलमऊ (रायबरेली)। कोतवाली क्षेत्र में मंगलवार को डलमऊ स्थित बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में रुपये निकालने आए एक किसान की संदिग्ध हालात में मौत हो गई।
वह बैंक के बाहर बैठा था, जबकि गांव का ही एक युवक विड्रॉल लेकर अंदर गया था। किसान की मौत से बैंक में हड़कंप मच गया।
मामले को दबाने के लिए शाखा प्रबंधक और कर्मचारी तरह-तरह के बहाने तलाशने लगे। वहीं परिवारीजनों ने रुपये निकालने में बैंक कर्मचारियों पर मनमानी का आरोप लगाया।
डलमऊ कोतवाली क्षेत्र के धीरपुर गांव निवासी चौबेलाल (50) बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में बीमारी के इलाज के लिए अपने रुपये निकलवाने के लिए आया था।
बैंक में खाताधारकों की भीड़ लगी होने के चलते वह बाहर बैठ गया, जबकि विड्रॉल भरकर उसने गांव के एक युवक को लाइन में लगा दिया।
घंटों बाद खाताधारक का नंबर आया तो शाखा प्रबंधक ने हस्ताक्षर करने के स्थान पर निकासी फार्म पर खाताधारक का अंगूठा लगा होने के कारण बताया कि पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी रायबरेली से हस्ताक्षर के स्थान पर खाताधारक का अंगूठा प्रमाणित कराया जाएगा।
उसके बाद ही रुपयों की निकासी की जाएगी। यह सुनकर बैंक के बाहर गेट पर बैठा बीमार किसान बेसुध होकर जमीन पर गिर गया और तड़पने लगा।
इसके बाद बैंक में हड़कंप मच गया। लोगों ने अधेड़ को बेहोश समझ कर पानी डालकर पंखा हांकने लगे। उसके बावजूद अधेड़ को होश नहीं आया।
लोगों ने इस घटना की सूचना अधेड़ के परिजनों को दी, सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने अधेड़ को डलमऊ सीएससी ले जाने लगे, लेकिन जब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
मृतक के पुत्र दिलीप ने बताया कि उसके पिता के खाते में 45 हजार रुपये जमा थे। पिता लगभग डेढ़ वर्षों से टीबी का मरीज था।
अपना इलाज कराने के लिए बैंक में पैसा निकलवाने के लिए आया था। बीमारी के कारण हस्ताक्षर करने में असमर्थ था। लेकिन शाखा प्रबंधक ने घंटों लाइन में लगाने के बावजूद रुपये नहीं निकाले।
शाखा प्रबंधक टीसी त्रिपाठी ने बताया कि खाताधारक का बैंक खाता हस्ताक्षर के आधार पर खोला गया था और निकासी फार्म पर अंगूठा लगा था, जिसके आधार पर धन निकासी करना नियमानुसार नहीं था। कोतवाल मणिशंकर तिवारी ने बताया कि जानकारी नहीं है। यदि तहरीर मिलती है तो जांच की जाएगी।