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केंद्रों पर 11 हजार मीट्रिक टन धान डंप, खरीद प्रभावित

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रायबरेली। जिले में खोले गए सरकारी क्रय केंद्रों पर धान तौल न होने से करीब तीन लाख किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ये है कि उठान न होने के कारण धान खरीद प्रभावित हो गई है।
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कुछ केंद्र तो ऐसे हैं, जहां पर पूरी तरह से धान खरीद ठप है। इससे किसान धान लेकर केंद्र तो पहुुंच रहे हैं, लेकिन उठान न होने की बात कहकर उनका धान तौलने से इंकार किया जा रहा है।
धान खरीद किस तरह प्रभावित है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता जिले के 82 क्रय केंद्रों पर 11 हजार मीट्रिक टन धान का उठान नहीं हो सका है।
जिले में किसानों की संख्या करीब साढ़े चार लाख है, लेकिन इसमें से तीन लाख किसानों को अपना धान क्रय केंद्रों पर बिक्री करना है। इधर, क्रय केंद्रों पर धान का उठान नहीं हो रही है।
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केंद्रों पर धान डंप है। इससे जब केंद्रों पर धान रखने के लिए जगह नहीं हैं तो उनका धान तौला नहीं जा रहा है। राही ब्लॉक क्षेत्र के उतरपारा में खुले क्रय केंद्रों पर खरीदा गया धान डंप है।
उठान न होने के कारण अब धान नहीं तौला जा रहा है। यही हाल सतांव, खीरों, ऊंचाहार समेत अन्य ब्लॉक क्षेत्रों का है, जहां पर उठान न होने से धान खरीद प्रभावित है।
जिला मुख्यालय स्थित मंडी समिति में खुले क्रय केंद्र में भी धान तौल धीमी गति से चल रही है। यहां पर अपना धान तौलाने के लिए किसानों को रतजगा करना पड़ रहा है।
इसलिए नहीं हो पा रही धान की उठान
मांगों को लेकर राइस मिल मालिकों ने हड़ताल शुरू कर दी थी। कई दिन चले प्रदर्शन के बाद राइस मिल मालिकों ने हड़ताल तो समाप्त कर दी, लेकिन राइस मिल मालिकों और धान खरीद कर रही एजेंसियों के बीच एग्रीमेंट का काम नहीं हो सका। इस काम में देरी की वजह से धान उठान नहीं हो पाया और अब धान तौल प्रभावित हो गई है।
रायबरेली राइस मिल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह कहते हैं कि जिले में 54 राइस मिल हैं। हमारा धान खरीद रही एजेंसियों के बीच एग्रीमेंट होता है कि हम लोग धान खरीदेंगे और उसकी कुटाई करने के बाद चावल उन्हें देंगे। एग्रीमेंट में देरी होने से केंद्रों से धान उठान नहीं किया जा रहा है।
ये भी किसानों के लिए परेशानी का सबब
दरअसल, धान बेचने के लिए किसानों को कई समस्याओं से होकर गुजरना पड़ रहा है। पहले तो किसानों को पंजीकरण कराने में दिक्कत आ रही है।
किसी तरह पंजीकरण कराया तो फिर सत्यापन कराने में मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बाद क्रय केंद्रों में धान तौलाने के लिए चक्कर काटने पड़ते हैं। धान तौल का नंबर आया तो धान सूखा न होने की बात कहकर किसानों को परेशान किया जाता है। ऐेसे में क्रय केंद्रों पर धान तौलाना किसानों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं
राही ब्लॉक क्षेत्र के खनुवा गांव के किसान हरिकिशन यादव कहते हैं कि उतरपारा में खुले क्रय केंद्र पर धान तौलाने के लिए गए थे। उठान न होने की बात कहकर धान नहीं तौला गया। इससे वापस घर लौटना पड़ा। ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया भी देना पड़ा।
क्रय केंद्र पर उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं मिला। किसान रामफेर, अरविंद कुमार, शिव प्रसाद कहते हैं कि मंडी समिति में खुले क्रय केंद्र पर धान तौलाने आए हैं। सर्दी में सुबह ही केंद्र आया था कि जल्द धान तौल जाएगा। पांच घंटे का समय बीत चुका है, लेकिन धान नहीं तौला है। लगता है कि केंद्र पर ही रात गुजारनी पड़ेगी। उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
आंकड़ों पर एक नजर
खरीद का लक्ष्य 1.71 लाख मीट्रिक टन
अब तक हुई खरीद 16000 मीट्रिक टन
केंद्रों पर डंप 11 हजार मीट्रिक टन
धान क्रय केंद्रों की संख्या 82
पंजीकरण कराने वाले किसान 30 हजार
सत्यापित किसान 19800
जिले के 82 क्रय केंद्रों पर धान तौल कराई जा रही है। राइस मिल मालिकों से एग्रीमेंट न होने की वजह से धान उठान प्रभावित हुई थी। केंद्रों पर 11 हजार मीट्रिक टन धान उठान करने के लिए डंप है।
फिलहाल बुधवार से उठान का कार्य शुरू करा दिया गया है। जल्द स्थिति में सुधार आ जाएगा। प्रयास किया जा रहा है कि किसानों का धान समय से तौला जाए। उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए।
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रामानंद जायसवाल, डिप्टी आरएमओ
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