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अमर उजाला एवं चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रोद्योगिक विश्व विद्यालय कानपुर का संयुक्त अभियान के तहत स्टार्टअप कार्यक्रम

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रायबरेली। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच है कि गांव का किसान खेती करने के साथ ही स्वरोजगार अपनाकर तरक्की की इबारत लिखे। बदलते परिवेश में खेती करने का तरीका बदल गया है। जैसे कि आधुनिक ढंग से खेती की जाए। खेती करने के साथ ही कई प्रोडक्ट तैयार करके उसे बेचकर आर्थिक स्थिति मजबूत करे। कहने का मतलब है कि किसान भी हाईटेक बने। कम समय में तैयार होने वाली फसलों की बोवाई करे।
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मौका था शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर में अमर उजाला एवं चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर का संयुक्त अभियान उत्थान स्टार्ट अप निर्माण एजीपेन 2019 के तहत आयोजित कार्यक्रम का, जहां पर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आय दोगुनी करने के तौर तरीके बताए।


कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि किसान खुद बीज तैयार करें। जैविक खाद बनाएं। औषधीय खेती के साथ-साथ पपीता, केला की खेती करने के लिए भी आगे आएं। आचार-मुरब्बा भी तैयार करें। कार्यक्रम में कई किसानों ने शिरकत की।
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किसान खुद तैयार करें बीज
देश के 78 फीसदी लोग आज भी कृषि पर आधारित हैं। समय की जरूरत है कि आय कैसे दोगुनी की जाए। इसके लिए खेती करने के साथ ही युवा, युवतियां कृषि आधारित उद्योग लगाएं। किसान खुद बीज तैयार करें, ताकि उन्हें मार्केट से बीज न लेना पड़े। सब्जी घर पर तैयार करें, ताकि उनका रुपया मार्केट न जाने पाए। पशुपालन करें। औषधीय खेती करें। फसल चक्र जरूर अपनाएं।
- डॉ. एचपी सिंह, निदेशक प्रसार, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्व विद्यालय कानपुर


सब्जी, नमकीन जैसे उद्योग लगाएं
प्रधानमंत्री का सपना है कि किसान की आर्थिक स्थिति में सुधार हो। यह तभी संभव होगा, जब किसान खेती के साथ ही स्वरोजगार से जुड़ें। इसलिए किसान स्वरोजगार का रास्ता चुनें। सब्जी, नमकीन, पापड़, चिप्स आदि ऐसे उद्योग लगाएं, जिससे खेती के साथ-साथ इन उद्योगों के जरिए उनकी आर्थिक स्थिति में मजबूत हो सके।
- डॉ. केके सिंह, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर, रायबरेली


कम लागत वाली फसल बोएं किसान
फसलों की बोवाई के साथ-साथ उनकी देखभाल करना भी बहुत जरूरी होता है। समय से फसलों की सिंचाई, निराई-गुड़ाई करना आवश्यक होता है। ऐसा करने से फसल उत्पादन बेहतर होता है। किसान कम लागत वाली फसलों की बोवाई करें, ताकि उन्हें अधिक मुनाफा हो सके।
- डॉ. आरके कनौजिया, शस्य वैैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर, रायबरेली


कृषि आधारित उद्योग लगाएं
पहले की अपेक्षा आज खेती से जुड़े संसाधन बढ़ गए हैं। इसके बाद भी किसान उतना सफल नहीं हो पा रहा है, जितनी उम्मीद की जाती है। धान, गेहूं समेत अन्य फसलों की सुरक्षा करना बहुत अहम होता है। किसान खेती करने के साथ ही आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि आधारित उद्योग भी लगाएं। ऐसा करने से ही उसके परिवार की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।
- डॉ. एके तिवारी, वैज्ञानिक फसल सुरक्षा, कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर, रायबरेली


पशुपालन कर बढ़ाएं आमदनी
प्राचीन समय से ही हमारे देश में पशुपालन का अहम रोल है। बावजूद इसके पशुपालन की तरफ अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसान खेती करने के साथ ही पशुपालन से जुड़कर अपनी आमदनी दोगुनी कर सकते हैं। पशुपालन से जुड़ने के बाद दूध के अलावा घी, मट्ठा, दही आदि की बिक्री आसानी से मार्केट में हो जाती है।
- डॉ. ओपी वर्मा, वैज्ञानिक पशुपालन, कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर, रायबरेली


आधुनिक ढंग से करें खेती
किसानों की तरक्की से ही हम सबकी तरक्की संभव है। समय के हिसाब से किसान आधुनिक ढंग से खेती करे। केला, पपीता की खेती करें। आचार-मुरब्बा को उद्योग लगाए। ऐसा करने से ही किसानों की आमदनी दोगुनी बढ़ेगी। पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी खेती से जुड़ें। खेती भी करे और उद्योग भी लगाए।
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-डॉ. दीपाली चौहान, वैज्ञानिक गृह विज्ञान, कृषि विज्ञान केंद्र दरियापुर, रायबरेली
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