केंद्र सरकार ने मिट्टी की सेहत जांच के बाद किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड का वितरण करा रहा है। कार्ड में किसानों को मिट्टी के पोषण की जानकारी के साथ-साथ स्वास्थ्य और उर्वरकता को सुधारने को भी पोषक तत्व मिलाने की जानकारी दी जाती है। मिट्टी के नमूनों की जांच के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। जिले के 100 गांवों की जमीन खेती करने लायक नहीं है। 30 गांवों में तो नाइट्रोजन व फाॅस्फोरस की मात्रा सबसे कम है।
यही नहीं अन्य गांवों में भी मिट्टी की स्थिति बहुत खराब है।जिले में कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफ ल 342764 हेक्टेअर में से कृषि क्षेत्रफल 187463 हेक्टेअर है। इसमें खरीफ में लगभग 127667 हेक्टेअर तथा रबी में 151048 हेक्टेअर क्षेत्र में बुवाई की जाती है। कृषि विभाग के अफसरों के मुताबिक जिले में वर्ष 2015-16 व 20016-17 में एक लाख 89 हजार 508 किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड का वितरण किया गया है।
मिट्टी के नमूनों की जांच में अमावां ब्लॉक की मृदा में नाइट्रोजन की उपलब्धता अति न्यून, फाॅस्फोरस की न्यून तथा पोटाश उच्च है। बछरावां की मृदा में नाइट्रोजन न्यून, फाॅस्फोरस अति न्यून एवं पोटाश उच्च पाया गया है। रोहनियां की मृदा में नाइट्रोजन अतिन्यून, फॉस्फोरस न्यून एवं पोटाश मध्यम है। शिवगढ़, राही, महाराजगंज, हरचंदपुर, सतांव, खीरों, लालगंज, सरेनी, डलमऊ, दीनशाह गौरा एवं अमावां की मृदा में नाइट्रोजन न्यून, फाॅस्फोरस अति न्यून एवं पोटाश की मात्रा उच्च स्तर पर पाया गया है।
राही के न्याय पंचायत रुस्तमपुर, इब्राहीमपुर, राही, गढीमुतवल्ली, कनौली, भंाव, अमांवा ब्लॉक की न्याय पंचायतें बावन बल्ला बुजुर्ग, पहाड़पुर, हरदासपुर, सिद्धौना और कोडरस, बछरांवा ब्लॉक की न्याय पंचायतें तिलेंडा, रामपुर सुदौनी, हरचन्दपुर की न्याय पंचायत डिघौरा, रेहवा, शिवगढ़ की न्याय पंचायत रेवान, बैंती, भोसी, खीरों ब्लॉक के निहस्था गांव समेत 30 गांवों की मिट्टी में नाइट्रोजन 0.20 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर व फाॅस्फोरस 10 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर है। यह मात्रा सबसे कम होने के कारण उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
इन गांवों की स्थिति भी ठीक नहीं
राही ब्लॉक खागीपुर सड़वा, भदोखर, लोधवारी, बेला भेला व सलीमपुर सीकी, अमावां के पहाड़पुर, दाउदनगर, अमांवा, बछरावां के सेहंगों पश्चिम, राजामऊ, थुलेंडी, इचौली, नीमटीकर, पड़री कलां, खैरानी, हरचंदपुर के टांडा पश्चिम गांव, हरचंदपुर, जोधवाना, गुल्लूपुर, शोभापुर, महाराजगंज के घुरौना, मंगारवी, हरदोई, चंदापुर, कैर, कुरना, हलोर, कोटवा मोहम्दाबाद, सतांव की न्याय पंचायत सतांव नकुलहा, देदौर, कोरिहर, अटौरा बुजुर्ग, सहजनवा, कल्यानपुर रेती, शिवगढ़ ब्लॉक के बेदारू, कसवा, शिवगढ़, बसंतपुर, लालगंज की न्याय पंचायत गहरी, भद्री, गोविंदपुर, बहाई, सेमरपहा, सारी बरिया खेडा, बेहटा कला, उत्तरा गौरी, खीरों की न्याय पंचायतें पाहो, अतराहर, भीतरगांव, बरवलिया, इकौनी, खींरो, बकुलिया, देवगांव, सेमरी, सरेनी की न्याय पंचायत चहोतर, रसूलपुर, हरिपुर, भोरा मऊ, सरेनी, मल्कीगांव, सागरखेडा, चिवलहा, रायपुर, भोजपुर, घुरेमऊ, नीमी, जगतपुर की न्याय पंचायत सनहू कुंआ, धोबहा, पूरबगांव, खजुरी जगतपुर समेत अन्य गांवों में नाइट्रोजन की मात्र 50 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर व फाॅस्फोेरस की मात्रा 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर से कम है।
दीनशाहगौरा ब्लॉक क्षेत्र के कुतुबुपुर गांव के किसान अभय प्रताप सिंह, हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के भुजवनखेड़ा गांव के किसान रामदीन, राही ब्लॉक क्षेत्र के इकछनिया गांव के सौरभ कुमार का कहना है कि उन्होंने भी अपने खेत की मिट्टी की जांच कराई थी। विभाग की तरफ से सॉइल हेल्थ कार्ड दिया गया है। मिट्टी में नाइट्रोजन, फाॅस्फोरस आदि कमी पाई गई है।
उपनिदेशक कृषि महेंद्र सिंह का कहना है कि कि मिट्टी की जांच के बाद एक लाख से ज्यादा किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड बांटे गए हैं। जांच में मिट्टी में नाइट्रोजन, फाॅस्फोरस, पोटाश आदि कमी मिली है, जो चिंता का विषय है। इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ रहा है। किसान अभी भी जागरूक नहीं हो रहा है। उर्वरक के बजाय जैविक खाद का प्रयोग किया जाए। ऐसा होने पर ही मिट्टी की सेहत ठीक रखी जा सकती है।