रायबरेली। साइबर ठग गैंग के तीन और अपराधियों की बुधवार को गिरफ्तारी के बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस की गिरफ्त में आया दिलशाद का भाई महताब आलम भी गैंग से जुड़ा है, जो दुबई से ही बैठकर गैंग का संचालन कर रहा था। महताब और पाकिस्तान के रहीम के तार आपस में जुड़े होने की बात भी आमने आई है।
जांच में पाया गया है कि महताब भारत से दुबई नौकरी के सिलसिले में गए कामगारों को टारगेट बनाता था। महताब कामगारों को ज्यादा पैसे देकर उनसे दुबई के रुपये ले लेता था। इसके बाद कैश डिपॉजिट मशीन (सीडीएम) के जरिए वह पैसा यहां वनाबिल बिजनेस सॉल्यूशन कंपनी चेन्नई के खाते में भेजता था।
कंपनी के खाते से पैसा निकलवाकर गिरोह के अन्य सदस्यों से कामगारों के घरों पर पैसे भिजवाता था। इससे कंपनी को फायदा होता था। ऐसे में यह गिरोह भारतीय मुद्रा को चोट पहुंचाने का काम कर रहा था। पुलिस की जांच में पाया गया है कि महताब ने अपने भाई दिलशाद समेत अन्य गैंग के सदस्यों के माध्यम से देशभर में करीब 10 हजार खाते खुलवाए हैं।
अभी तक वनाबिल बिजनेस सॉल्यूशन कंपनी चेन्नई के दो खातों में 907 करोड़ के लेनदेन की बात सामने आई है। मामले की जांच कर रही पुलिस का दावा है कि देश में खुलवाए गए 10 हजार खातों में तीन हजार करोड़ से ज्यादा का लेनदेन हुआ है।
बुधवार को पुलिस ने तमिलनाडु प्रांत के सेलवा विनगर कोडुगैयुर चेन्नई निवासी जावेद जलाल, एनएसके नगर अरुमवक्कम चेन्नई निवासी मथीअजागन और बिहार प्रांत के सिवान जिले के माधोपुर निवासी दिलशाद आलम को गिरफ्तार किया था। जावेद वनाबिल बिजनेस सॉल्यूशन कंपनी का निदेशक है।
दिलशाद कंपनी की देखरेख करता है। दिलशाद का भाई महताब आलम है, जो दुबई में रहकर गिरोह से जुड़ा है। जावेद की कंपनी के एचडीएफसी बैंक खाते में दो करोड़ 34 लाख 700 रुपये रायबरेली से कैश डिपॉजिट मशीन के माध्यम से भेजे गए थे। खाते का लेनदेन 142 करोड़ रुपये पाया गया था।