142 कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। एक-एक कर्मचारी
पर आठ से 10 ग्राम पंचायतों का बोझ है। मनरेगा के कार्यों के लिए रखे गए
ग्राम रोजगार सेवकों के भरोसे किसी तरह से काम निपटाया जाता है।
गांवों में
विकास कार्यों के लिए प्रस्ताव तक नहीं बन पा रहे हैं। नई ग्राम पंचायतों
के गठन के बाद बैंकों में खाते तक नहीं खुल पाए हैं।
राही ब्लॉक क्षेत्र में वीडीओ रणवीर सिंह को आठ ग्राम पंचायतें दी गई हैं।
शेर मोहम्मद सिद्दीकी के जिम्मे सात ग्राम पंचायतों का काम है।
जगतपुर
ब्लॉक क्षेत्र में ग्राम पंचायत अधिकारी अशोक सिंह को नौ ग्राम पंचायतें
सौंपी गई है। हालत ये है कि काम का अधिक बोझ होने के कारण विकास कार्य पूरी
तरह से ठप है।
मनरेगा समेत अन्य योजनाएं शुरू नहीं हो सकी है। खास बात यह
कि ग्राम प्रधान कर्मचारियों को ढूंढ नहीं पा रहे हैं। इससे विकास कार्य
पूरी तरह से ठप है।
लोगों का कहना है कि एक सचिव को दो से पांच ग्राम
पंचायतें देनी चाहिए, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण ग्राम पंचायतों का
आवंटन सही ढंग से नहीं किया गया है।
तमाम ऐसे भी कर्मचारी हैं, जिन्हें 10
से अधिक ग्राम पंचायतें मिली हैं, जबकि कई ऐसे भी हैं, जिन्हें पांच से कम
ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसका खामियाजा गांव के लोगों को
भुगतना पड़ रहा है। समय से कार्ययोजना न बन पाने के कारण विकास कार्य समय
से नहीं हो पा रहा है।
ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष प्रमोद
अवस्थी का कहना है कि जब तक कर्मचारियों की संख्या नहीं बढे़गी तब तक
सकारात्मक परिणाम नहीं आ सकते हैं।
कर्मचारी काम अधिक होने के कारण सुचारु
रूप से काम नहीं कर पा रहा है। रणवीर सिंह का कहना है कि मजबूरी में काम
करना पड़ रहा है। किसी न किसी तरह काम को निपटाना पड़ता है।
जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के हरदीटीकर के ग्राम प्रधान अमरेश सिंह का कहना है
कि सचिव के पास कई ग्राम पंचायतें होने के कारण विकास प्रभावित हो रहा है।
कोई जानकारी तक नहीं मिल पा रही है। सिद्धौर के ग्राम प्रधान दिनेश कुमार
का कहना है कि समितियों के गठन के लिए हुई पहली बैठक के बाद वीपीओ अशोक
सिंह गांव नहीं आए।
ब्लॉक जाते हैं तो वहां भी ठीक से बात नहीं करते। कहते
हैं कि काम अधिक है, क्या करें। राही ब्लॉक क्षेत्र के दरियापुर के प्रधान
ज्योति शरण यादव का कहना है कि अब तक खाते तक नहीं खुल पाए हैं।
सुलखियापुर
के प्रधान गोवर्धन प्रसाद का कहना है कि कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए,
नहीं तो विकास नहीं हो पाएगा। जिले में ग्राम पंचायत अधिकारियों की संख्या है।
डीपीआरओ डॉ.
संजय यादव ने बताया कि सृजित पदों के सापेक्ष भी
कर्मचारी नहीं है। उपलब्ध कर्मचारियों के सहारे काम कराया जा रहा है।
कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बाद ही समस्या से निजात मिल सकेगी।