बिजली सप्लाई के बाद अब पानी की सप्लाई निजी हाथों में देने की तैयारी है। निजीकरण की खास बात यह होगी कि लोगों को 24 घंटे पानी मिलेगा और गंदा पानी आने की शिकायत का समाधान तुरंत किया जाएगा।
पहले मॉडल के तौर पर गाजियाबाद के कुछ मुहल्लों में इसका ट्रायल लिया जाएगा। यदि यह सफल रहा तो इसे प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में लागू किया जाएगा।
हालांकि, यह अभी प्रारंभिक दौर में है। उच्चाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद प्रस्ताव नगर विकास मंत्री को भेजा जाएगा।
प्रदेश में जलापूर्ति की स्थिति काफी खराब है। खासकर शहरों में लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पा रहा है। इसलिए लोग अपने घरों में सबमर्सिबल पंप लगवा रहे हैं या निजी बोरिंग वालों की मदद ले रहे हैं।
जल संस्थान से लोगों को दिन में छह से आठ घंटे ही पानी मिल पा रहा है। जवाहर लाल नेहरू अरबन नवीनीकरण मिशन योजना के तहत प्रदेश के सात शहरों आगरा, लखनऊ, वाराणसी, मेरठ, कानपुर, मथुरा और इलाहाबाद जलापूर्ति के लिए कई काम कराए जा रहे हैं।
इस योजना की शर्तों में यह शामिल है कि शहरी लोगों को 24 घंटे पानी की आपूर्ति तीसरे से चौथी मंजिल तक पूरे फोर्स के साथ की जाए। नगर विकास विभाग इसके लिए काम भी कर रहा है।
नगर विकास विभाग से कुछ बड़ी कंपनियों ने वाटर सप्लाई व्यवस्था अपने हाथ में लेने का प्रस्ताव भी दिया है। कंपनियां शीघ्र ही इसका प्रस्तुतीकरण भी करेंगी।