नागपंचमी के पर्व पर शहर से लेकर गांव तक भक्तिमय माहौल बना रहा। दूध-लावा चढ़ाकर नागदेव की पूजा हुई। भगवान भास्कर की लालिमा फैलने के साथ ही महिलाएं पूजन की टोकरी में दूध, लावा, चना, मटर आदि लेकर घर से दूर बागों, खेतों, सड़कों व मंदिरों की ओर निकल पड़ीं। पारंपरिक तौर-तरीकों से नागदेव का पूजन कर परिवार की सलामती की मन्नतें मांगी। पूरे दिन शहर से लेकर गावं तक आस्था और भक्ति की बयार बहती रही।
सावन मास में नागपंचमी का दिन नागदेव के विशेष पूजन अर्चन का दिन होता है। नागदेव के इस विशेष दिन का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है। शुक्रवार को नागपंचमी के दिन नागदेव के पूजन को लेकर महिलाओं में अटूट आस्था दिखी। भोर से ही महिलाएं टोकरी में लावा, दूध, मटर, चना, पुष्प, धूप, दीप आदि सहेज कर रखने लगीं। उन्हें इंतजार था सूर्योदय का। जैसे ही भगवान भास्कर की लालिमा धरती पर पड़ी तो महिलाएं अपने अपने हाथों में पूजन की टोकरी को लेकर नागदेव के पूजन-अर्चन वाले पारंपरिक स्थानों की ओर निकल पड़ीं। बागों में, खेतों, सड़कों पर नागदेव की भक्ति को समर्पित गीतों को गुनगुनाते हुए उनका आह्वान किया। इसके बाद दूध, लावा, मटर, चना फूल माला अर्पित कर, दीप जलाकर नागदेव की आरती उतारी। शहर में महिलाओं ने मां बेल्हादेवी मंदिर, पल्टन बाजार स्थित शिवमंदिर, अष्टभुजानगर स्थित शिव मंदिर सहित मुहल्लो में स्थित सभी देवस्थलों पर पूजन किया, वहीं अंचल के रानीगंज, पट्टी, लालगंज, सदर, कुंडा क्षेत्र में महिलाओं भी महिलाओं ने पारंपरिक स्थानों पर नागदेव को दूध लावा चढ़ाया। इस दौरान भक्ति और आस्था का विहंगम नजारा दिखा।