महिलाएं कार और दोपहिया वाहन खरीदने में तो आगे हैं, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में बहुत पीछे हैं। हर साल पंजीकृत होने वाले लगभग 18 फीसदी वाहन महिलाओं के नाम दर्ज हैं, लेकिन पिछले सात माह में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या चार फीसदी( 637) है।
जिले में हर साल करीब 50 से 55 हजार ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते हैं। इसे बनवाने में जिले की महिलाएं पुरुषों के मुकाबले काफी पीछे हैं। जनवरी से लेकर जुलाई माह तक सात महीने में सिर्फ 637 महिलाओं ने ही लाइसेंस बनवाया है, जबकि पुरुषों की संख्या 18,024 है।
उप संभागीय विभाग के आंकड़़ों के अनुसार जिले में 18 फीसदी वाहन हर साल महिलाओं के नाम से पंजीकृत होते हैं। दोपहिया वाहन, कार यहां तक कि व्यावसायिक वाहन भी महिलाओं के नाम पंजीकृत हैं। इसकी अपेक्षा महिलाओं के ड्राइविंग लाइसेंस बहुत कम बनते हैं।
पांच हजार रुपये होता है जुर्माना
एआरटीओ के अनुसार बगैर लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये का जुर्माना होता है। यदि चालक के पास डीएल नहीं है तो दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा क्लेम नहीं मिलता।
एक नजर लाइसेंस के आंकड़ों पर
13 लाख से ज्यादा ड्राइविंग लाइसेंस पंजीकृत है
1 जनवरी से 31 जुलाई तक बनवाए गए लाइसेंस-
पुरुष : 36,545
महिलाएं : 637
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महिलाओं के नाम वाहन भले ही पंजीकृत हों, लेकिन उनके लाइसेंस की संख्या कम है। छात्राएं और कामकाजी महिलाएं ही लाइसेंस बनवाने पर ध्यान देती हैं। महिलाओं में जागरूकता लाने की जरूरत है।
दिलीप गुप्ता, उप संभागीय परिवहन अधिकारी, प्रवर्तन