विधानसभा चुनाव में कूदे प्रत्याशी चुनाव अधिकारियों से बगैर अनुमति लिए ही रैली और मीटिंग कर रहे हैं। लिखा-पढ़ी से बचने के लिए वह शार्टकट का तरीका निकाल लिए हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि कड़ी कार्रवाई का ढिढोरा पीटने वाले अधिकारी यह सब देखने के बाद मुंह फेर लेेते हैं। हालांकि अभी तक दो प्रत्याशियों के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा हो चुका है।
चुनावी समर में कूदे प्रत्याशी इन दिनों अपना माहौल बनाने में लगे हुए हैं। जनता को अपनी ताकत दिखाने के लिए रैली और मीटिंग में भारी भरकम भीड़ जुटा रहे हैं। मगर वह चुनाव अधिकारियों से अनुमति नहीं ले रहे हैं। बड़े नेताओं के कार्यक्रम रद्द होने की डर से वह अनुमति ले रहे हैं, मगर स्थानीय स्तर पर जुलूस रैली और प्रदर्शन के लिए आरओ को जानकारी नहीं दे रहे हैं। जबकि चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन और संबंधित विधानसभा के चुनाव अधिकारी को नामित कर रखा है। प्रत्याशी लिखा-पढ़ी से बचने और खर्च छिपाने के लिए अनुमति ही नहीं ले रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि प्रत्येक विधानसभा में तीन-तीन सचल दस्ते दिन भर गस्त कर रहे हैं, मगर वह देखने के बाद भी मुकदमा दर्ज कराने से कतराते हैं।
शुक्रवार को कोहंडौर थाने में आचार संहिता के उल्लंघन का मुकदमा उस समय हुआ, जब अचानक प्रेक्षक पहुंच गए। अपनी गर्दन फंसते देख अफसरों ने प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। यह किसी एक विधान में नहीं हो रहा है, बल्कि कमोबेश अधिकांश विधानसभाओं के प्रत्याशी कर रहे हैं, मगर जिला प्रशासन इन उम्मीदवारों पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। जिला सहायक चुनाव अधिकारी और एडीएम राम सिंह वर्मा ने बताया कि यह जिम्मेदारी सचल की है। अगर कोई रैली, जुलूस और जनसभा हो रही है, तो सचल दल को जांच करनी चाहिए, वरना मुकदमा दर्ज कराना चाहिए।