बिजली चोरी रोकने के लिए शासन ने गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को दस रुपये और गरीबी रेखा के ऊपर रहने वाले लोगों को 110 रुपये में कनेक्शन देने का अभियान चला रखा है। बिजली विभाग के कर्मचारी रसीद काटने के पहले विभाग का खर्च बताकर पांच-पांच सौ रुपये सुविधा शुल्क वसूल रहे हैं। जो लोग रुपये देने में आनाकानी करते हैं, उन्हें परेशान किया जा रहा है, लेकिन विभागीय अधिकारी इससे पूरी तरह से अनजान बने हुए हैं।
बताते चलें कि जिले में बिजली चोर विभाग को हर साल करोड़ों का चूना लगाते थे। विभाग जिस अनुपात में बिजली खर्च करता था उस अनुपात में उसकी वसूली नहीं पाती थी। ग्रामीणांचल में बिजली चोरी खूब धड़ल्ले से की जाती थी। विभाग की तरफ से कनेक्शन चार्ज के रूप में मोटी किश्त ली जाती थी, जिसके चलते कनेक्शन लेने में लोग रुचि नहीं दिखाते थे। वहीं सामान्य रूप से गुजर बसर करने वाले भी कनेक्शन के लिए जुगाड़ ही बैठाने में लगे रहते थे। खर्च की अधिकता चलते कनेक्शन करा पाना आसान नहीं होता था। इसी में कटियामारी कर बिजली चोरी का खेल खूब होता था। इसे देखते हुए विद्युत विभाग ने घर-घर कनेक्शन का अभियान की पहल शुरू की, जिसमें गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवारों के लिए महज 10 रुपये में ही कनेक्शन देने का निर्देश दिया गया।
10 रुपये में कनेक्शन देने के बाद निर्धारित कनेक्शन चार्ज में एक आसान मासिक किस्त तय की गई है, जिससे लोग आसानी से कनेक्शन ले सकें। वहीं गरीबी रेखा से ऊपर वालों के लिए भी कनेक्शन के लिए 100 रुपये की आसान मासिक किश्त निर्धारित की गई है। बिजली विभाग की तरफ से इन दिनों कनेक्शन दिए जा रहे हैं, लेकिन इसके साथ वसूली भी शुरू हो गई है। कर्मचारियों ने इसे कमाई का जरिया बना लिया है। जानकारी के अभाव के चलते कैंप में आने वाले लोगों को कर्मचारी रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग का हवाला देकर मनमाफिक रुपये वसूल रहे है। कुछ इस पर सवाल खड़े करते हैं तो उन्हें तरह-तरह के कागजी कोरम बताक र सुविधा शुल्क देने के लिए मजबूर कर देते हैं। वहीं कर्मचारियों के इस अभियान में दलाल भी लगे हुए हैं ,जो केवल गरीब व कम-पढ़े लिखे लोगों को कैंप तक ला रहे हैं। सस्ते कनेक्शन के लिए बरगलाकर उनसे अपनी जेब तो भर ही रहे हैं, साथ ही साहब को भी चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।