गेहूं खरीदने के लिए बनने वाले क्रय केंद्रों की संख्या इस बार घट गई है। पिछले वर्ष 48 क्रय केंद्र बनाए गए थे, जो इस वर्ष 38 कर दिए गए हैं। इससे किसानों को गेहूं बेचने के लिए दूर-दराज स्थित क्रय केंद्रों का चक्कर लगाना होगा। किसानों का गेहूं खरीदने के लिए विपणन विभाग और पीसीएफ को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए शासन ने 1975 रुपये प्रति कुंतल गेहूं की दर निर्धारित कर दी है। जिले में किसानों का गेहूं खरीदने और भुगतान करने की जिम्मेदारी खाद्य एवं विपणन विभाग और पीसीएफ को सौंपी गई है। हालांकि अभी जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य नहीं आया है। इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि जिले में कितना गेहूं खरीदा जाना है।
फिलहाल जिला प्रशासन ने पहले चरण में खाद्य एवं विपणन विभाग के 17 और पीसीएफ के 21 केंद्र निश्चित किए हैं। इन केंद्रों पर तैनात कर्मचारी किसानों से सीधे गेहूं खरीद करेंगे। गेहूं क्रय करने वाले किसानों को पहले की तरह आनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
इसके बाद नंबर आने पर संबंधित केंद्र पर अपनी उपज को बेच सकेंगे। किसानों का गेहूं खरीदने में बिचौलियों को कोई स्थान नहीं दिया गया है। कर्मचारी और किसान के बीच सीधा संबंध होगा, जो अपने नजदीक के केंद्रों पर गेहूं की बिक्री कर सकेंगे।
जिले में पहले चरण में 38 क्रय केंद्र खोले जाएंगे। उसके बाद किसानों की मांग पर और केंद्रों को खोला जा सकता है। गेहूं बेचने वाले किसानों को पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा। अजीत कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी