सोमवार को पारा ठिठुरने से लोगों की जिंदगी ठिठक गई। विगत 22 दिसम्बर 2011 के बाद जिले में इस तिथि पर कभी इतनी ठंड नहीं पड़ी। ठंड से बेल्हा कांप उठा। पूरे दिन घने कोहरे की चादर तनी रही। सूर्य देव के दर्शन को लोग तरस गए। गलन इतनी तेज थी कि रजाई के भीतर भी लोगों को गलन से निजात नहीं मिल रही थी। लाचार हुए गर्म कपड़ों की गठरी बने ज्यादातर लोग आग के सामने बैठे रहे। सरकारी कार्यालयों में रूम हीटर जला अधिकारी व कर्मचारी काम करते नजर आए। ठंड के मारे बदन में जकड़न की स्थिति रही। अधिकतम मतलब दोपहर के तापमान ने छह साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। ठंडी लगने से पूरेभीखा गांव में दो अधेड़ की मौत हो गई। इस तरह दो दिन के भीतर ठंड से मरने वालों की संख्या आठ पहुंच गई है।
रिकार्ड के मुताबिक इस माह 22 तारीख को वर्ष 2011 में 1.5 न्यूनतम व 18.1 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रिकार्ड किया गया था। इसके बाद तीन साल तक न्यूनतम तापमान इतना नीचे कभी नहीं गिरा। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण तीन साल बाद 2014 में दिसम्बर 22 की सुबह का न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया जबकि अधिकतम तापमान 11.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसमविद देशराम मीना के मुताबिक छह साल की ठंडी में अधिकतम तापमान इतना कभी नहीं लुढ़का। उत्तरी व पश्चिमी हवा बराबर चलने के कारण पहाड़ी क्षेत्र की बर्फबारी का असर यहां दिख रहा है। बताते चलेंकि रविवार की रात करीब 10 बजे ही कोहरे ने जिले को छाप लिया था। सोमवार की सुबह सारा दिन घने कोहरे की चादर तनी रही। कोहरे की वजह से वाहन चालक दोपहर में भी बत्ती जलाकर रास्ता चलने को मजबूर रहे। गलन इतनी तेज थी कि रजाई पानी हो गई थी। रजाई के भीतर भी लोगों को सुकून नहीं था। गर्म कपड़े बेअसर रहे। कई परत गर्म कपड़ों में लिपटने के बाद भी लोगों को आग का सहारा लेना पड़ा।
जगह-जगह निजी व्यवस्था से लोग आग जलाकर तापते नजर आए। सरकारी कार्यालयों में सारे दिन रूमहीटर जलते रहे। लोग दिन भर सूर्यदेव के दर्शन को तरस गए। मगर वह ऐसे दुबके कि ठंड में बाहर निकलने का साहस ही नहीं दिखा सके। बाजारों में भी सन्नाटे की स्थिति रही। बदन के जोड़ों में जकड़न की स्थिति बनी रही। ठंड लगने से मंगरौरा के पूरेभीखा निवासी राजबली उर्फ शिकंदर वर्मा (55) व पुरानी जामताली निवासी कल्लू गुप्ता (58) की मौत हो गई। कल्लू बीरापुर रोड स्थित अपनी चाय की दुकान पर बैठा था। अचानक मौत बन कर ठंड उसके कलेजे में घुस गई। एम्बुलेंस 108 से अस्पताल जा ही रहा था कि रास्ते में ठंड ने उसका प्राण ले लिया। राजबली वर्मा बेचारा घर पर आग ताप रहा था। अचानक ठंड से वह कांपने लगा। परिजन गर्मी देने का प्रयास कर रहे थे। मगर वह बच नहीं सका। ठंड से छह लोगों की मौत रविवार को हुई थी। इस तरह दो दिन के भीतर मरने वालों की संख्या आठ हो गई है। सुबह के वक्त मौसम में 100 और दोपहर के समय 75 प्रतिशत नमी दर्ज की गई है।