मंगरौरा विकास खंड में जलस्तर करीब 15 फिट नीचे खिसकने के कारण पेयजल संकट गहरा गया है। तालाबों में बूंद भर पानी नहीं है। इससे ग्रामीण इलाकों में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बताया जाता है कि पदमपुर, हथसारा, सराय शंकर, गंगापुर, मलाक , चंदौका, सुजानगढ़, मदाफरपुर, परशुरामपुर, छांछा आदि गांवों में पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ब्लाक के आंकड़ों पर गौर किया जाय तो करीब 4586 इंडिया मार्का द्वितीय हैंडपंप लगे हैं। इसमें तकरीबन 367 हैंडपंप पानी देना इसलिए बंद कर दिए हैं कि जलस्तर काफी नीचे खिसक गया है।
बताया जाता है कि इन हैंडपंपों को रीबोर कराने के लिए कई बार लोगों ने जलनिगम से मांग की लेकिन अभी तक कोई पहल नहीं हुई है। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 68 ग्राम पंचायतों में 398 तालाब हैं। किसी भी तालाब में बूंद भर पानी नहीं है। कुओं का आलम यह है कि ये सूख गए हैं। लोग सिर्फ हैंडपंप पर निर्भर हैं। जहां हैंडपंप खराब हो गए हैं, उस गांव के लोग निजी पंपसेट से प्यास बुझा रहे हैं। वहीं क्षेत्र में नहरों का जाल बिछा हुआ है, मगर जनवरी के बाद नहर में बूंद भर पानी नहीं आया। चिलबिला रजबहा से जुड़ी गंगापुर माइनर, सुजानगढ़ माइनर, कोहंडौर माइनर सूखी पड़ी हुई है। वहीं बताया जाता है कि विकास खंड और सीएचसी गेट के सामने लगा इंडिया मार्का हैंडपंप खराब हो गया है। इससे ब्लाक और अस्पताल आने वाले लोगों को प्यास बुझाने के लिए दुकानों का चक्कर लगाना पड़ता है। लोगों की मानें तो करीब तीन माह से खराब हैंडपंप ठीक कराने के लिए पहल नहीं की गई है।