बढ़ती गर्मी के साथ ही पानी की समस्या भी बढ़ती जा रही है। हैंडपंपों ने भी पानी देना छोड़ दिया है तो कुओं से सिल्ट निकल रही है। अब भी गांवों में पानी के साधन बने कुओं से लोगों को उम्मीद है, लेकिन घटता जलस्तर कुओं में कीचड़ पैदा कर दे रहा है। उधर तालाबों में एक बूंद भी पानी नहीं है। नहरों और नालों में भी धूल उड़ रही है।
विकास खंड कुंडा में 170 तालाब हैं। इनको नहरों और निजी संसाधनों से भराया जाना है। बावजूद इसके एक भी तालाब में पानी नहीं है। नहरों में पानी न आने के कारण तालाब में पानी पहुंच ही नहीं रहा है। यही नहीं नहरों के सहारे चलने वाले नाले भी सूखे पडे़ हैं। ऐेसे में पशु -पक्षियों को भी पानी के लिए परेेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विकास खंड में करीब 6000 से अधिक हैंडपंप लगे हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर पानी देना बंद कर दिए हैं।
ज्यादा दूर नहीं कस्बे के शिवपुरम में ही हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। इसके चलते लोगों को पानी की किल्लत हो गई है। कुंडा नगर में पानी की सप्लाई आती है लेकिन लोग इसका उपयोग नहाने सहित अन्य दैनिक उपयोग के लिए करते हैं। पीने के लिए पानी वह नलों का ही उपयोग करते हैं। ब्लाक से करीब डेढ़े सौ नलों के रिबोर होने की सूची गई है लेकिन अभी तक उस पर कोई काम नहीं हो सका है। कुंडा के ही भुलसा गांव में पानी की समस्या के चलते ग्रामीण गांव का कुआं स्वयं ही साफ कर रहे हैं। कीचड़ होने से लोगों को पानी नहीं मिल रहा था। ऐसे में वह उसकी सफाई में जुट गए हैं।