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घर शव पहुंचते ही आक्रोशित लोगों ने की तोडफ़ोड़

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नगर कोतवाली के पूरे ईश्वरपुर में मारपीट में घायल युवक की इलाज के दौरान मौत से आक्रोशित परिजनों को - फोटो : PRATAPGARH
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मारपीट में घायल वृद्ध का शव घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। आक्रोशित लोगों ने विवादित जमीन पर बने पशुशाला का टीनशेड क्षतिग्रस्त कर दिया। उसी जमीन पर शव दफनाने की जिद पर परिजन अड़े रहे। सूचना पर पहुंचे सीओ सिटी ने सभी को समझाबुझाकर शांत कराया। 18 घंटे बाद शव को दफनाने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।
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नगर कोतवाली के ईश्वरपुर बेनीपुर निवासी शिव प्रसाद पाल का पड़ोसी विजय पाल से विवाद चला आ रहा था। शनिवार को विवादित जमीन पर बने पशुशाला के टीनशेड को लेकर दोनों पक्षों में मारपीट हो गई। मारपीट में शिव प्रसाद और उसका बेटा महेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को उपचार के लिए प्रयागराज ले जाया गया। सोमवार की सुबह शिव प्रसाद की मौत हो गई। जिसके बाद गांव में तनाव बना था। घटना के आरोपी विजय व उसके भाई बृजेश को पुलिस ने जेल भेज दिया। सोमवार की शाम शिव प्रसाद का शव घर पहुंचा। लाश देखते ही परिवार के लोग बिलखने लगा। आक्रोशित लोगों ने विवादित जमीन पर बने टीनशेड को तोडफ़ोड़ कर गिरा दिया।
मंगलवार की सुबह परिजन विवादित जमीन पर शव दफनाने की जिद पर परिजन अड़ गए। सूचना मिलने पर सीओ सिटी अभय पांडेय व कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। परिजनों को विवादित जमीन पर शव दफनाने से रोक दिया। जिसके बाद परिवार के लोग आरोपियों की गिरफ्तारी व आर्थिक मदद के अलावा सुरक्षा की मांग करने लगे। सीओ सिटी ने बताया कि दो आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है। अन्य मांगों को पूरा करने के लिए अधिकारियों के सामने उनकी बातें पहुंचा दी जाएगी। काफी मशक्कत के बाद 18 घंटे बाद परिजन शव दफनाने के लिए राजी हुए। तब जाकर पुलिस ने राहत की सांस ली।
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नौ विस्वा जमीन को लेकर छिड़ी है दो दशक से जंग
नगर कोतवाली के ईश्वरपुर बेनीपुर निवासी शिव प्रसाद पाल व विजय के परिजनों से दो दशक पहले नौ विस्वा जमीन को लेकर जंग छिड़ी है। शिव प्रसाद के परिजनों का कहना है कि विजऱ्य का परिवार कुछ लोगों द्वारा बसाया गया था। दो दशक से नौ बिस्वा जमीन का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था। कई बार समाज के लोगों की पंचायत भी हुई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। मृतक पक्ष के लोगों का कहना था कि विजय पक्ष के लोग जबरन उसकी जमीन पर कब्जा कर रहे थे। मना करने पर मारपीट पर उतारू रहते हैं, जबकि भू अभिलेखों में उनका कहीं भी नाम नहीं दर्ज है। राजस्व विभाग भी शिकायत के बाद समस्या का निस्तारण नहीं करा सका।
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