इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के लिए जनपद से बाहर जाना होगा। क्योंकि जिले में ऐसे शिक्षण संस्थान नहीं हैं। जबकि परंपरागत विषयों के लिए विद्यार्थियों को भटकने की आवश्यकता नहीं होगी। 10 मई तक जिले में डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़कर 102 हो गई है। हालांकि इसमें बीएससी और बीकॉम की पढ़ाई गिने-चुने कॉलेजों में होती है।
इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण 65,806 परीक्षार्थियों की भारीभरकम फौज के लिए सबसे बड़ी समस्या तकनीकी शिक्षा की है। जिले में प्रोफेशनल कोर्स (तकनीकी शिक्षा) के लिए अधिकृत संस्थानों की कमी होने के कारण विज्ञान वर्ग के अधिकांशपरीक्षार्थियों को जिले से बाहर जाना होगा। जिले में बीई, बीबीए, बीसीए, बीफार्मा, बीटेक के लिए अच्छे संस्थान नहीं होने के कारण परीक्षार्थियों को गैरजनपद के संस्थानों का मुंह देखना होगा। स्नातक कक्षाओं में विज्ञान वर्ग के परीक्षार्थियों को बीएससी, एमएससी और बीकॉम के लिए भी गिने-चुने विद्यालय मिलेंगे। जबकि परंपरागत पाठ्यक्रमों के लिए जिले में डिग्री कॉलेजों की कमी नहीं है। वर्ष 2013 जहां डिग्री कॉलेजों की संख्या 67 हुआ करती थी, वहीं वर्ष 2016 में डिग्री कॉलेजों की संख्या बढ़कर 102 पहुंच गई है। ग्रामीण इलाकों में खुले अधिकांश डिग्री कॉलेजों में जहां नकल कराने का गोरखधंधा चल रहा है, वहीं परीक्षा के समय मौजूद नहीं रहने वाले परीक्षार्थियों की कापी जमा कराने के लिए मोटी रकम वसूली जा रही है। इसका खुलासा कुलपति के निरीक्षण में हो भी चुका है।