राजकीय इंटर कालेज अपनी पहचान खोते जा रहे हैं। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में पहली बार ऐसा हुआ कि राजकीय कालेजों का कोई भी बच्चा मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सका है। सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों के बच्चे टापटेन की सूची में शामिल रहे।
इंटर की परीक्षा में विद्यार्थियों के पास होने का प्रतिशत 92.3 फीसदी रहा। हालांकि बीते वर्ष की तुलना में इस वर्ष इंटर की परीक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों में .18 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि हाईस्कूल की परीक्षा में विद्यार्थियों के पास होने का प्रतिशत 85.49 प्रतिशत है। बीते वर्ष 86.71 प्रतिशत रिजल्ट था। इस प्रकार इस वर्ष के रिजल्ट में 1.22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
वित्तविहीन और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के बच्चे जहां जिले की मेरिट में हावी रहे, वहीं राजकीय स्कूलों के बच्चे टॉप टेन मेरिट से नदारद हैं। जिले के टापरों की सूची में ही नहीं बल्कि दूर-दूर तक जीआईसी और जीजीआईसी के बच्चों का नाम नहीं दिखा। इसकी वजह जो भी रही हो। डीआईओएस शिव कुमार ओझा ने राजकीय स्कूलों का पठन-पाठन सुधारने के लिए जुलाई में कठोर कदम उठाने की बात कही है।