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आधा-अधूरे प्रशिक्षण से तैयार हो रहे अध्यापक

Sat, 22 Oct 2016 11:57 PM IST
प्रतापगढ़
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 जिले के महाविद्यालयों में बीएड में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को सिर्फ किसी तरह कोरम पूरा कर डिग्री थमाई जा रही है। दरअसल, अधिकांश कालेजों में बीएड का प्रशिक्षण देने के लिए यूजीसी के मानक के मुताबिक अध्यापक ही नहीं हैं। कालेज प्रबंधन जुगाड़ के शिक्षकों से किसी तरह कोर्स का संचालन करवा रहे हैं। कहीं क्लास नहीं चलती तो कहीं टीचिंग का प्रशिक्षण नहीं होता। कई जगहों पर वैकल्पिक विषय नहीं पढ़ाए जा रहे हैं।
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जिले में करीब 25 महाविद्यालयों में बीएड का कोर्स संचालित हो रहा है। जिनमें तीन अनुदानित और 22 स्ववित्तपोषित हैं। दरअसल अधिकांश कालेजों ने मान्यता लेते वक्त भी शासन और विश्वविद्यालय को अंधेरे में रखा। मान्यता लेते वक्त जिन शिक्षकों का नाम दर्शाया गया वे महाविद्यालयों में कार्यरत ही नहीं है। उनके स्थान पर जुगाड़ और बिना योग्यता के लोगों से बीएड की कक्षाएं संचालित करवाई जा रही हैं। टीचिंग का प्रशिक्षण शायद ही कहीं होता हो।

अधिक नंबर पाने के चक्कर में कभी छात्र-छात्राएं भी कभी इसका विरोध नहीं करते। विश्विविद्यालय की तरफ से भी कभी कालेजों का निरीक्षण कर वास्तविकता खंगालने की जरूरत नहीं समझी जाती। यूजीसी के नियमों के मुताबिक बीएड की क्लास लेने वाले के लिए एमएड के साथ नेट व निर्धारित मानक के अनुरूप पीएचडी होना जरूरी है। कुछ दशाओं में बीएड के साथ एमए एजुकेशन के साथ नेट-पीएचडी धारक भी कक्षाएं ले सकते हैं।
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जिले के अधिकांश महाविद्यालयों में सिर्फ एमएड पास लोग ही कक्षाए ले रहे हैं। कई जगह तो हालात ऐसे हैं कि अध्यापक एमएड भी नहीं हैं। बीएड प्रशिक्षण में 16 वैकल्पिक विषयों का निर्धारण किया गया है। छात्र-छात्राओं को इन्हीं वैकल्पिक विषयों से लगभग दो माह की टीचिंग ट्रेनिंग स्कूलों में कराई जाती है।जिले के कई बीएड कालेजों में  वैकल्पिक विषयों का प्रशिक्षण प्रध्यापकों के अभाव में नहीं दिया जा रहा है। 2015-16 से बीएड का प्रशिक्षण द्विवर्षीय कर दिया गया है। ऐसे में अतिरिक्त कक्षाओं के संचालन के लिए शिक्षकों का पूरी तरह से अभाव हो गया है।
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