शासन ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को पैकेट बंद दूध वितरण करने का आदेश दिया है, मगर जिले के स्वास्थ्य कर्मचारी मोटी कमाई करने के चक्कर में मरीजों को खुला और मिलावटी दूध पीलाकर उनका स्वास्थ्य ठीक करने की जगह और बिगाड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को सुबह आधा लीटर दूध दिया जाता है। शासन ने जिम्मेदार अधिकारियों को आदेशित किया है कि मरीजों को पैकेट बंद दूध दिया जाए। मगर बेल्हा के अफसरों को पैकेट बंद दूध महंगा पड़ रहा है। लिखापढ़ी में पैकेट बंद दूध वितरण दिखाया जाता है, मगर सुबह खुला दूध वितरित किया जाता है।
इतना ही नहीं दूध से ज्यादा उसमें पानी मिला होता है। इससे भर्ती मरीजों का स्वास्थ्य ठीक होने की जगह अधिकारियों की इस लूटखसोट से और स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। इसके चलते ज्यादातर मरीज दूध लेने से इनकार कर देते हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी भर्ती मरीज को दूध वितरण दिखाकर पैसे को हजम कर जाते हैं। शासन ने मरीजों को सुबह बेड के साथ मौसमी फल या फिर एक अंडा देने का आदेश दिया है। मगर अस्पताल में भर्ती मरीजों को न तो मौसमी फल मिलता है और न ही अंडा और ब्रेड। लेकिन लिखापढ़ी में मरीजों के बीच वितरण हो रहा है। सबसे मजेदार बात यह है कि अस्पताल में वितरण होने वाले इन खाद्य सामग्री को मरीजों और तीमारदारों को जानकारी न हो इसके लिए कहीं मेन्यू बोर्ड भी नहीं लगाया गया है। इस ओर किसी जिम्मेदार अधिकारी का भी ध्यान नहीं पड़ रहा है।