दो वक्त की रोटी के लिए दिनभर जूझने वालीं महिलाओं को अब चूल्हा पर रोटी नहीं बनानी पड़ रही है, बल्कि वह गैस चूल्हे पर खाना बना रही है। उनके पास इतने रुपये नहीं थे, वह गैस चूल्हा और सिलिंडर खरीद सकें, मगर उज्ज्वला योजना ने जिले की सवा लाख महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है।
महिलाओं को लाभांवित करने के लिए मोदी सरकार की प्राथमिकता वाली उज्ज्वला गैस योजना चलते जिले के 1,22,944 परिवारों में अब लकड़ी के चूल्हे पर खाना नहीं बन रहा है। गैस चूल्हे पर खाना बन रहा है। हालांकि गरीब परिवार की महिलाओं को उस समय झटका लगा था, जब शासन ने गैस सिलिंडर और चूल्हे की धनराशि की भरपाई सब्सिडी से करने का फैसला किया। इससे उपभोक्ताओं ने सिलिंडर रिफिल कराना ही बंद कर दिया।
बाद में केंद्र सरकार ने शुरुआत के छह चरणों में इस पर रोक लगा दी। इससे लोगों को बड़ी राहत मिली। उज्ज्वला गैस योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को दिया जा रहा है, जो गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। हालांकि योजना प्रारंभ होने के पहले ही कुछ परिवारों ने गैस कनेक्शन ले रखा था। मगर जिले की 50 गैस एजेंसियों का दावा है कि 31 मई तक जिले की 1,22,944 महिलाओं के नाम कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं।
मोदी सरकार की इस पहल से महिलाएं उस समय और गौरवांवित हो जाती हैं, जब उनके नाम से गैस कनेक्शन की किताब मिलती है। दरअसल, गांव की कुछ महिलाएं ऐसी थीं, जिनका आधार कार्ड ही नहीं बना था, मगर गैस कनेक्शन लेने के चक्कर में घर के लोगों ने आनन-फानन में उनका आधार भी बनवा दिया।
उज्ज्वला गैस योजना महिलाओं के लिए बेहद कल्याणकारी साबित हुई है। जिन महिलाओं को गैस का कनेक्शन मिला है, वह सदुपयोग कर रही हैं। महिलाओं के चूल्हा फूंकने से मुक्ति मिलने पर उनका स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
रोहित गुप्ता, सेल्स ऑफीसर, इंडेन गैस।