सदर ब्लॉक में प्रमुख पद का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है। ब्लॉक प्रमुख के पद पर कब्जा जमाने के लिए दो पक्षों में जबरदस्त खींचतान मची हैै। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की प्रत्याशी के बेटे ने सदर विधायक पर हत्या की धमकी और बीडीसी सदस्यों को उठाने का आरोप लगाया है। इधर, भाजपा समर्थित अपना दल प्रत्याशी ने दूसरे पक्ष पर बीडीसी सदस्यों को गायब करने का आरोप लगाया है। संडवा चंद्रिका ब्लॉक में भी बीडीसी सदस्यों को गायब करने का आरोप लगा है।
क्षेत्र पंचायत प्रमुख पद के लिए शनिवार को होने वाले मतदान से पहले बीडीसी सदस्यों की खरीद-फरोख्त और उठा ले जाने के आरोपों की झड़ी लगी रही। सदर, संडवाचंद्रिका, शिवगढ़, मानधाता के ब्लॉक प्रमुख प्रत्याशी एक-दूसरे पर बीडीसी सदस्यों को गायब करने के आरोप लगाते रहे। सदर ब्लॉक प्रमुख के लिए नामांकन करने वाली शेषा सिंह के पुत्र अजय कुमार सिंह ने सदर विधायक राजकुमार पाल और प्रमुख प्रत्याशी के पुत्र बबलू सिंह पर हत्या की धमकी देने का आरोप लगाते हुए एसपी आफिस में शिकायत की। इधर, सदर विधायक राजकुमार पाल ने इन आरोपों को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि यह लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। ये बीडीसी सदस्यों को खुद गयब कर हमारे ऊपर आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सदर में ब्लॉक प्रमुख कोई भी चुना जाए, उसका पूरा सम्मान है। मेरा इस चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है। इधर, संडवा चंद्रिका, मानधाता, रानीगंज से भी बीडीसी सदस्यों के अपहरण और उठाने की शिकायतें आती रहीं। पुलिस के बीडीसी सदस्यों के परिजनों से बात करने पर पता चला कि रजामंदी से लोग घूमने गए हैं। सीओ सिटी अभय कुमार पांडेय ने बताया कि सदर ब्लॉक प्रमुख प्रत्याशी के बेटे की ओर से कोई तहरीर नहीं मिली है। फिलहाल सोशल मीडिया के माध्यम जानकारी होेने पर जांच की जा रही है।
सत्ता की दिखी हनक, आधी रात को पहुंची भारी भरकम फोर्स
विधायक की हनक पर आधी रात को शहर के शुकुलपुर स्थित युवा नेता देशराज सिंह के घर पुलिस पहुंची और दरवाजा पीटती रही। आश्चर्य की बात यह रही कि रातभर पुलिस दरवाजे पर पहरा देती रही और सुबह पता चला कि जिसकी तलाश में पुलिस है वह लखनऊ में है।
तो क्या पूर्व एमएलसी की दखल के बाद अखिलेश ने नहीं किया नामांकन
मदाफरपुर। मंगरौरा ब्लॉक प्रमुख पद के लिए चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे अखिलेश सिंह ने ऐनवक्त पर अपने कदम पीछे खींच लिए। बताया जा रहा है कि कि जौनपुर के पूर्व एलएलसी के समझौता कराने के बाद उन्होंने नामांकन नहीं करने का फैसला किया था। अखिलेश सिंह को नामांकन करने के लिए हाईकोर्ट ने पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दिया था।
मंगरौरा ब्लाक में प्रमुख पद के दावेदार अखिलेश सिंह ने अपने पैर ऐेसे ही ही पीछे नहीं खींचे थे बल्कि, नामांकन से एक दिन पहले जौनपुर के पूर्व एमएलसी कुंवर वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह मोती सिंह और अखिलेश सिंह के बीच आधी रात तक पंचायत कर समझौता कराया था। हालांकि अखिलेश सिंह ने नामांकन करने के मार्ग में आ रही बाधाओं को देखकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने डीजीपी को आदेश दिया था कि वह बीडीसी सदस्य अखिलेश सिंह का नामांकन कराएं। हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए एएसपी सुरेंद्र प्रसाद द्विवेदी, सीओ पट्टी और कंधई कोतवाल के साथ अखिलेश के घर पहुंचे थे। मगर समझौते के तहत अखिलेश सिंह ने नामांकन करने से मना कर दिया। पुलिस अधिकारी उनकी बात मानने के लिए तैयार नहीं थे, मगर अखिलेश सिंह के लिखित देने के बाद पुलिस अफसर लौट गए।