गर्मी बढ़ने के साथ ही जिले में बिजली ने लोगों को झटका देना शुरू कर दिया है। तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार डोल रहा है। शहरी क्षेत्र में ट्रिपिंग और अघोषित बिजली कटौती से परेशान लोगों की समस्या बढ़ गई है।
वहीं, ग्रामीण इलाकों में हाईटेंशन तार टूटने, लाइनों में शाॅर्ट सर्किट एवं जंफर उड़ने से आए दिन बिजली गुल हो रही है। बिन बत्ती उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों की नींद में भी खलल पड़ रहा है।
यह हाल तब है, जब पूरे साल बिजली व्यवस्था के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर किए गए। इसके बाद भी व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं हो पा रहा है। मई में गर्मी से बचने के लिए घरों में कूलर, पंखे और एसी बिना रोक-टोक चल रहे हैं। यही वजह है कि अप्रैल के सापेक्ष मई महीने में बिजली की मांग डेढ़ गुना तक बढ़ गई है।
विद्युत विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल में जहां 120 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई, वहीं मई में करीब 160 मिलियन यूनिट बिजली की खपत हुई है। अधिकांश उपकेंद्रों पर लगे उपकरण ओवरलोड हैं। ऐसे में लोगों को लो-वोल्टेज की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
शहर के आंबेडरनगर, दहिलामऊ, बस अड्डा, करनपुर, पूरे ईश्वरनाथ, पंजाबी मार्केट, सदर बाजार समेत अन्य मोहल्लों के लोग ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। पूरे ईश्वरनाथ के उपभोक्ता हरीश शुक्ला, जेपी मिश्रा ने बताया कि दिन ही नहीं, रात में भी कई बार बिजली की आवाजाही हाेती है।
हर आधे से एक घंटे में बिजली कुछ देर के लिए गुल हो जाती है। जिससे बिजली के उपकरण के खराब होने का खतरा अधिक रहता है।
ग्रामीण अंचल के उपकेंद्रों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है, लोगों का आरोप है कि महज 12 से 14 घंटे ही बिजली मिलती है। विद्युत उपकेंद्र भुपियामऊ ग्रामीण, रानीगंज अजगरा समेत अन्य उपकेंद्रों से निकले फीडरों की लंबाई अधिक होने के कारण अक्सर लाइनों में फाॅल्ट बना रहता है। इस वजह से बिजली गुल हो जाती है।
किसान अमित कुमार, विजय प्रकाश, सतीश पाठक व विवेक तिवारी ने बताया कि नहरों में पानी नहीं आ रहा है। धान की नर्सरी डालनी है, लेकिन बिजली नहीं आने से खेत तैयार नहीं हो पा रहे हैं।