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अवैध कब्जों और आवारा पशुओं से ट्रैफिक धवस्त

Wed, 06 Jun 2018 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़। प्रशासन स्तर से अतिक्रमण हटाओ अभियान पर लगाई गई अघोषित रोक के कारण शहर के मुख्य मार्गों के दोनों ओर फुटपाथों पर फिर से अवैध कब्जे होने से यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। यह हाल तब है जब अभी अधिकांश शिक्षण संस्थाएं ग्रीष्मावकाश में बंद चल रहीं हैं और स्कूली वाहन सड़कों से गायब हैं। शहरी आबादी के बीच चलने वाली डेयरी के दुधारू पशुओं को नदियों में लाने व ले जाने के कारण भी सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो रही है। डेयरी संचालकों को नोटिस भी दिया जा चुका है, लेकिन नतीजा शून्य है।
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शहर में लगभग सभी प्रमुख बाजारों में व्यापारियों ने दुकानों के आगे फुटपाथ तक सामान सजा लिया है। लोगों को उस वक्त दिक्कत होती है जब कार्यालय, मुकदमों के सिलसिले में कचहरी और अस्पताल जाना होता है। घंटों लोग जाम के झाम में जूझते रहते हैं। शहर में संचालित डेयरी के पशुओं का झुंड भी सड़कों पर आ जाता है। उनके पीछे ट्रैफिक रेंगते हुए निकलता है। शहर के कचहरी से लेकर चौक मार्ग पर सबसे अधिक श्रीराम तिराहा से लेकर चौक घंटाघर तक, पंजाबी मार्केट, जिला अस्पताल से लेकर जीआईसी के पास तक, चौक घंटाघर से लेकर भंगवा चुंगी तक, सब्जी मंडी शिवमंदिर के पास, जेल रोड क्रासिंग, नया माल गोदाम रोड क्रासिंग पर जाम के झाम में लोगों को हर दिन फंसना पड़ रहा है। इन स्थानों पर जाम लगने से स्टेशन रोड, सदर बाजार रोड, चिलबिला मार्ग, अंबेडकर चौराहे का आवागमन प्रभावित होता है।

रोड पर वाहनों की पार्किंग से बढ़ीं समस्याएं
जिले के सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय के आंकड़ों पर गौर करें तो विभिन्न श्रेणियों के पंजीकृत वाहनों की संख्या लगभग सवा लाख है। बदले दौर में क्रय शक्ति बढ़ी तो तमाम ऐसे लोगों ने लग्जरी वाहन खरीद लिए, जिसके पास उन्हें खड़े करने का स्थायी ठिकाना नहीं हैं। शहर के व्यस्ततम चौराहा श्रीराम तिराहा, चौक घंटाघर, सदर बाजार, बाबागंज समेत शहर के अन्य मार्ग वाहन पार्किंग का अघोषित अड्डा बन चुके हैं।
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ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या से सड़कों पर चलना दूभर
कहने को शहरी क्षेत्र में केवल 517 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, लेकिन इससे कई गुना अधिक अवैध ई-रिक्शा शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। परिवहन विभाग का अनुमान है कि करीब दो हजार गैर पंजीकृत ई-रिक्शा और पांच सौ से अधिक टेंपो बगैर रजिस्ट्रेशन के दौड़ाए जा रहे हैं। गनीमत यह है कि टेंपो वाले शहर के अंदरूनी रास्तों पर दाखिल नहीं होते लेकिन ई-रिक्शा वालों के कोई रूट तय नही है। पंजाबी मार्केट में भी वे भीड़ भाड़ के बावजूद घुस जाते हैं। इससे लोगों का पैदल चलना दूभर हो जाता है। भीड़ भरे बाजारों में सवारी के इंतजार के लिए ई-रिक्शा की लाइन लगी होना आम बात है।

शहर की संचालित डेयरी से हो रही दिक्कतों को देखते हुए शासन ने सभी दुग्ध कारोबारियों को डेयरी आबादी वाले इलाके से दूर स्थापित करने का आदेश जारी किया था। नगर पालिका ने चिन्हित सभी डेयरी संचालकों को नोटिस थमाया था लेकिन इसके बाद भी डेयरी संचालक अभी अपने स्थान पर डटे हुए हैं। नगर पालिका और जिला प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम भी नहीं उठाया गया।  

अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे शहरियों की दिक्कत को देखते हुए शासन ने शहर की सड़कों व पटरियों पर हुए अतिक्रमण हटाने का निर्देश जिला प्रशासन को दे रखा है। नगर पालिका ने तो बाकायदे टीम भी गठित कर दी है। इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने के लिए जिला प्रशासन अपना पैर पीछे खींच लिया है। जिससे समस्या का निदान नहीं हो पा रहा।
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