स्वच्छ भारत मिशन योजना में 12.23 करोड़ रुपये घपले की बंद फाइल को जांच के लिए फिर से खोल दिया गया। जिले में प्रचार-प्रसार के नाम पर 8.87 करोड़ रुपये और 3.36 करोड़ रुपये कंटीजेंसी के मद में आई हुई थी। विकास विभाग के अफसरों व कर्मचारियों ने मनमाने ढंग से भुगतान कर लिया था। तमाम फर्जी बिल-बाउचर लगाए गए हैं। इससे विकास विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
जिले में स्वच्छ भारत मिशन अभियान के प्रचार-प्रसार मद में आए 8.87 करोड़ रुपये का खेल हुआ है। बैनर, पोस्टर और होर्डिंग लगाने के साथ ही एलईडी वाहन के नाम पर यह धनराशि खर्च दिखाई जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि न तो जिले में कहीं बैनर लगे और न ही होर्डिंग। फिलहाल डीपीआरओ कार्यालय से जिले भर में लगने वाली होर्डिंग और बैनर के मद में भुगतान भी कर दिया गया है।
कंटीजेंसी के मद में 3.36 करोड़ आए हुए थे। वैसे तो यह धनराशि डीपीआरओ कार्यालय के साथ ही 17 विकास खंडों के लिए आई हुई थी। मगर इसका उपभोग डीपीआरओ कार्यालय ने किया है। ब्लाकों पर तैनात एडीओ पंचायत को न धनराशि मिली और न ही कोई सामान मिला, मगर भुगतान रसीद पर हस्ताक्षर करा लिया गया है।
डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने 12.23 करोड़ रुपये के घपले की तलब की है। मगर डीपीआरओ ने सीडीओ को गुमराह करते हुए बिल बाउचर दिखाने के बजाय सादे कागज पर खर्च का विवरण दिखाने का प्रयास किया। जिसे सीडीओ ने खारिज करते हुए प्रत्येक वित्तीय वर्ष में कितने रुपये मिले और खर्च होने का विवरण तलब किया है। आश्चर्य की बात यह है कि सीडीओ के यह रिपोर्ट मांगने के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी रिकार्ड दिखाने में आना-कानी कर रहे हैं।
सांसद और विधायक नहीं ले पाए हिसाब
शौचालय में हुए घपले की आवाज दिशा की बैठक में उठने के बाद निवर्तमान सांसद और विधायकों ने डीपीआरओ कार्यालय पहुंचकर हिसाब मांगा। मगर डीपीआरओ कागज दिखाने के लिए समय मांगते रहे और उन्होंने अभिलेखों को नहीं दिखाया। इधर, आचार संहिता की घोषणा होते ही डीपीआरओ के खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
घपले में हटाया जा चुका है लेखाकार
शौचालय में घपले का मामला कोई नया नहीं है, इसके पहले भी लेखाकार पर घपले का आरोप लगने पर उसे निलंबित किया जा चुका है। हालांकि अभी बहाल नहीं हुआ है।
शौचालय के घपले की फाइल तलब की गई थी, डीपीआरओ ने आधी-अधूरी फाइल दिखाई थी। जिसे वापस कर दिया गया है, सत्र वार धन का आवंटन और खर्च का विवरण तलब किया गया है।
धीरेंद्र प्रताप सिंह, सीडीओ