इस बार होलिकादहन प्रदोषकाल में होगा और दूसरे दिन सुबह से ही रंगों की बौछार शुरू हो जाएगी। ज्योतिष जानकारों की मानें तो 28 साल बाद ऐसा संयोग हुआ है, जब प्रदोष काल में होलिका दहन व भरणी-भद्रा से परे रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।
शुभ मुहूर्त के साथ ही लोग पर्व मनाते हैं। कई बार भरणी-भद्रा व शुभ मुहूर्त के चक्कर मेें लोग पर्वों का पूरी तरह से आनंद नहीं उठा पाते, पर इस बार ऐसा नहीं रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. आलोक ने बताया कि 28 साल बाद यह संयोग बन रहा है। 1990 में इस संयोग में होली मनाई गई थी। शनिदेव धनु राशि में रहेंगे और होलिकादहन प्रदोषकाल में होगा। एक मार्च यानी गुरुवार की सुबह 7:53 से शाम 6:58 तक भद्रा है। इसके बाद प्रदोषकाल शुरू हो जाएगा।
इस काल में होलिकादहन बहुत ही शुभ माना जाता है। गुरुवार को 6:58 से रात 1 बजकर 30 मिनट तक सुविधानुसार होलिकादहन कर सकते हैं, जबकि 2 मार्च को होली के पर्व पर सुबह से रंग गुलाल उड़ने लगेगा। ज्योतिषाचार्य पं. आलोक ने बताया कि धनु राशि पर शनिदेव की चाल होने से व्यापार पर सकारात्मक प्रभाव पडे़गा। इस संयोग को व्यापारियों के लिए लाभप्रद माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंदी का दौर खत्म होगा और लोगों की आय में वृद्धि होगी।