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Pratapgarh News: मनोज और सोनू की दोस्ती के बीच नहीं थी मजहब की दीवार

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ये दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे, छोड़ेंगे दम मगर तेरा साथ न छोड़ेंगे...। शोले फिल्म का यह गाना मनोज और सोनू की पक्की दोस्ती पर फिट बैठता नजर आया। जिंदा थे तो साथ में, मरे तो जनाजा थी साथ में निकला। दोनों की शव यात्रा में शामिल लोग उनकी दोस्ती की दुहाई देते और रोते जा रहे थे। एक हिंदू तो दूसरा मुसलमान था। लेकिन इनका मजबह कभी दोस्ती के बीच दीवार बनकर नहीं आया। सोमवार को दोनों का शव घर पहुंचा तो परिजनों में चीत्कार मच गई। देर शाम दोनों का रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया।
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बरहूपुर निवासी मनोज सरोज पुत्र रामजतन व इसी गांव के निवासी सोनू में गहरी मित्रता थी। रविवार को शाम लगभग तीन बजे दोनों अपने एक अन्य मित्र उमेश पुत्र हरदेव निवासी बरहूपुर के साथ एक ही बाइक से घर पर निमंत्रण खाने जाने की बात बताकर निकले थे।
जैसे ही इनकी बाइक बरहूपुर से आगे स्थित पेट्रोल पंप के निकट पहुंची कि नहर पुलिया के समीप तातोमुरैनी की तरफ से आ रही बोलेरो ने इनकी बाइक को टक्कर मार दी। बोलेरो की टक्कर से बाइक चला रहा मनोज उछलकर नहर के पानी में जाकर डूब गया। जबकि सोनू छिटककर नहर पुलिया से टकराकर घायल हो गया था। साथ रहा उमेश भी घायल हो गया था। इलाज के दौरान मनोज व सोनू की मौत हो गई थी।
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सोमवार को दोनों का शव उनके घरों पर लाया गया तो यहां मौजूद लोग शव देखकर रो पड़े। मनोज की पत्नी पूजा अपने बच्चों को पकड़कर रो रही थी। सोनू की पत्नी आशमा बेगम अपने बेटे शहजाद व बेटी शहजादी से लिपटकर रो रही थी।
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