किसानों पर प्रकृति का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार को सारा दिन तीखी धूप लोगों को झुलसाती रही। रात में बारिश से बचीखुशी फसल भी बर्बाद हो गई। मटियामेट हुई फसलों को देख किसानों का कलेजा मुंह को आ गया है। जिनकी फसल खलिहान में थी वे किसान भी नष्ट ही समझ रहे हैं। क्योंकि भीगने के कारण अब उसे समेट पाना संभव नहीं रहा। एडीएम ने फिर तहसील प्रशासन को इस बारिश से हुए नुकसान का लेखपालों से सर्वे कराने का निर्देश दिया है।
कुछ रोज पहले भी बारिश हुई थी। उसमें अफसरों ने तकरीब पांच लाख क्विंटल गेहूं के उत्पादन के नुकसान का अनुमान लगाया था। तहसीलवार नुकसान का सर्वे शासन को तीन दिन पूर्व ही भेजा गया था कि प्रकृति फिर किसानों के लिए कहर बन गई। मौसमविद् देशराज मीना के मुताबिक रविवार रात से सुबह तक पांच मिली मीटर बरसात हुई। इस बारिश से उन किसानों की पूर्व में हुई बरसात से बचीखुची फसल भी नष्ट हो गई। कृषि रक्षा अधिकारी अमित जायसवाल के मुताबिक इस बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं, सरसों और गेहूं की फसल का हुआ है क्योंकि ज्यादातर कटे हुए गेहूं खलिहान में थे। बाकी की कटाई का काम चल रहा है। वह कहते हैं कि खलिहान में जो फसलें थीं वे पानी पाने से फूल जाएंगी।
रविवार की रात हुई बारिश की तेजी का आंकलन यहीं से किया जा सकता कि नगर की खड्ड युक्त सड़कें ताल-तलैया में तब्दील हो गईं है। सारा दिन आसमान में छाए बादल किसानों की रूह कंपाते रहे। बर्बाद फसलों की स्थिति सोचकर सभी हैरान व परेशान रहे। शहर की सड़कें कीचड़ में तब्दील हो गईं। जोगापुर के पास हाइवे व अंबेडकर चौराहा, पीडब्लूडी के सामने जलभराव से यात्री परेशान रहे। सदर चौराहे से चिलबिला तक की स्थिति और भी बदतर रही। बारिश और बादल की वजह से न्यूनतम तापमान 21.4 व अधिकतम 23.8 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।