जिले के औद्योगिक क्षेत्र सुखपालनगर में जल निकासी के लिए नाला निर्माण पर 2.38 करोड़ रुपये खर्च किए गए फिर भी हालात नहीं बदले। बारिश के दौरान जलभराव और टूटी सड़कें अब भी उद्यमियों व स्थानीय लोगों के लिए परेशानी बनी हैं।
कार्यदायी संस्था यूपी लघु उद्योग निगम को जून तक नाला निर्माण कराना था, जो अभी तक अधूरा है। उद्यमियों और स्थानीय लोगों ने बताया कि कार्यदायी संस्था निर्माण को अधूरा छोड़कर गायब हो गई। औद्योगिक क्षेत्र में जलभराव की समस्या है। दुर्गंध के कारण लोगों का जीना दुश्वार हो गया है।
लोगों ने बताया कि 1993 में सुखपालनगर को बसाया गया था। यहां के सैकड़ों लोगों का आना-जाना औद्योगिक क्षेत्र के बीच से होता है। रास्ते में पानी भरा होना से दिक्कत होती है। लोगों का कहना है कि साल बदल रहा है लेकिन यहां के हालात नहीं बदले। कूड़े का ढेर, गंदगी, जलभराव आदि कि समस्या अभी तक बनी है।
इनसेट-
परिसर में बनाया गया नाला मुख्य नाले से नीचे है, इस कारण जल निकासी की समस्या बनी हुई है। 15 वर्षों से जिस समस्या का निदान खोजा जा रहा था, रुपये खर्च होने के बाद भी उसमें सुधार नहीं हुआ। - अनुराग खंडेलवाल, व्यापारी
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नाला मानक के विपरीत बना हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र में नाला नीचे होने के कारण पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। इससे फैक्टरी का पानी मैदान व सड़कों के किनारे जमा है। - विनय सिंह, व्यापारी
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फैक्टरियों से निकले पानी से बदबू आती है। इस पानी से संक्रमण फैलने की आशंका है। सड़कें इतनी बदहाल हैं कि वाहन चालक सामान लेकर आने के लिए तैयार नहीं होते हैं। - मो.अनाम व्यापारी
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वर्जन-
नाला निर्माण के अधूरे कार्य को पूरा कराने के लिए निर्देश दिए जाएंगे। कार्यदायी संस्था अगर जल्द निर्माण शुरू नहीं करती है तो उसपर कार्रवाई की जाएगी। - अभिषेक पांडेय, जिलाधिकारी
सुखपालनगर औद्योगिक क्षेत्र में भरा गंदा पानी। संवाद
सुखपालनगर औद्योगिक क्षेत्र में भरा गंदा पानी। संवाद
सुखपालनगर औद्योगिक क्षेत्र में भरा गंदा पानी। संवाद
सुखपालनगर औद्योगिक क्षेत्र में भरा गंदा पानी। संवाद