जिला के लोहिया समग्र गांव में जिला प्रशासन विकास कार्यों को जहां अधिक तरजीह दे रहा है वहीं उन स्कूलों में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। दर्जनों पूर्व माध्यमिक स्कूल उधार के शिक्षकों से चल रहे हैं जबकि प्राइमरी स्कूलों में स्थायी शिक्षक के बजाय प्रशिक्षु अध्यापकों से पठन-पाठन कराया जा रहा है।
शासन बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रयासरत हैं। मगर विभागीय अधिकारी उनकी उम्मीदों को धूमिल करने पर तुले हैं। अधिकांश लोहिया समग्र गांव के स्कूल उधार के शिक्षकों से संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों में स्थायी शिक्षक नहीं होने से बच्चों की संख्या में कमी होने के साथ ही शैक्षिण गुणवत्ता भी घटती जा रही है। संडवाचंद्रिका विकास खंड का जगदीशपुर लोहिया समग्र गांव चयनित है। वहां स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है।
यह स्कूल उधार के शिक्षक से चल रहा है। इसी ब्लॉक का प्राइमरी स्कूल कोठानेवढ़िया और सरायतिहइत प्रशिक्षु शिक्षकों के भरोसे चल रहा है। इन स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। यह तो महज उदाहरण हैं। ऐसे अनेक स्कूल हैं, जहां शिक्षक की तैनाती नाममात्र की है। हालांकि विभाग के पास भी इसका आंकड़ा नहीं है कि किस स्कूल में कितने शिक्षक तैनात हैं। बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि पूर्व माध्यमिक स्कूल जगदीशपुर में प्रमोशन पाने वाले शिक्षक की तैनाती गुरुवार को की गई है।