बेलखरनाथ ब्लाक में मुर्दे भी स्वच्छता मिशन में हिस्सा ले रहे हैं और गांवों में स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहे हैं। चौंकिए मत। यह सच्चाई है। जिले के लापरवाह कर्मचारियों ने स्वच्छता मिशन में मरे लोगों के साथ रिटायर हो चुके लोगों की भी ड्यूटी लगा दी है। इन्हें स्वच्छता जागरूकता मिशन का जिम्मा दे दिया गया है। कर्मचारियों की इस लापरवाही से स्वच्छता मिशन को लेकर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
स्वच्छता की मुहिम को सफल बनाने के लिए जिले के आला अफसरों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है, लेकिन उनके कर्मचारी ही अभियान को पलीता लगाने में जुटे हैं। उनकी लापरवाही से विभाग और अफसरों की किरकिरी हो रही है। बेलखरनाथ ब्लॉक में आशा पद पर कार्यरत कांती देवी का निधन हो चुका है। स्वच्छता मिशन में उनकी ड्यूटी अशोकपुर, चरैया, मकरा मनभवना में लगा दी गई है।
इसी प्रकार आशा संजू सिंह की भी मौत हो चुकी है। उनकी ड्यूटी ईशनपुर, आसलपुर, जोगीपुर में लगाई गई है। आशा रेखा सिंह की वर्ष 2016 में ही मौत हो चुकी है, लेकिन उनकी भी ड्यूटी विभाग के कर्मचारियों ने लगा दी है। इसी तरह एएनम कमला मिश्रा, सुदामा देवी वर्ष 2015 में रिटायर हो चुकी हैं। एएनम शशीप्रभा, सावित्री मौर्या, उर्मिला दूबे भी सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। इन सभी की ड्यूटी लगाई गई है।
इसके अलावा निर्मला गुप्ता, रंजू देवी ने अपने पद पर चयनित होने के बाद ज्वाइनिंग नहीं ली, लेकिन इनकी भी ड्यूटी लगी है। यह हाल अकेले बेलखरनाथ में नहीं, बल्कि कई अन्य ब्लाकों में भी है। विभाग के कर्मचारी योजनाओं को लेकर इस तरह की लापरवाही तब कर रहे हैं जब जिले के मुखिया इस महत्वपूर्ण मिशन की सफलता को लेकर रात दिन एक किए हुए हैं।