पुलिस और सहायक संभागीय परिवहन विभाग की मिलीभगत से ट्रकाें में ओवरलोडिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। ट्रक चालक निर्धारित क्षमता से तीन गुना अधिक माल लादकर सड़कों की दशा बिगाड़ रहे हैं। पुलिस और एआरटीओ दफ्तर के लोग पैसा पाने के बाद चुप्पी साध लेते हैं। हालत यह है कि ओवरलोड ट्रक रात ही नहीं दिन में भी जिले की सड़कों से गुजर रहे हैं और इन्हें टोकने वाला कोई नहीं है।
सामान्य तौर पर छह चक्का ट्रक पर नौ टन माल ढोया जा सकता है। इसी प्रकार 10 चक्का से 15 और 12 चक्का से 21 टन की पासिंग होती है। इसके विपरीत जनपद में देखा जाए तो सभी ट्रकों पर निर्धारित क्षमता से तीन गुना माल ढोया जा रहा है। जिले से ट्रक दिनदहाड़े पार होते हैं और उन्हें टोकने वाला कोई नहीं होता। शासन ने ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के आदेश का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया है। ट्रक संचालन के कारोबार से जुडे़ लोगाें की मानें तो हर जिले में दो से तीन हजार इंट्रीफीस तय है। हर ट्रक चालक से इसकी वसूली आरटीओ और एआरटीओ के करीबी करते हैं। जो ट्रक मालिक इंट्रीफीस देने से इनकार करता है उसका चालान कर दिया जाता है। ओवरलोडिंग से न केवल सरकारी राजस्व को चूना लग रहा है बल्कि जनपद की सड़कें भी कबाड़ में परिवर्तित हो जा रही हैं। इस बाबत कोई टोकने वाला नहीं है। इससे ओवरलोडिंग का खेल दिनोंदिन फलफूल रहा है।
इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग से गुजरने वाले ट्रकों में सीमा से कई गुना अधिक माल लदा रहता है। इससे हाईवे की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। मौजूदा समय में भारी वाहनों के आवागमन ने जोगापुर से लेकर चिलबिला तक हाईवे को बदहाल कर दिया है। सबसे बुरा हाल जोगापुर से लेकर भंगवा चुंगी तक का है। यहां से गुजरने में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्षमता से अधिक मोरंग, गिट्टी और दूसरा सामान ट्रकों पर लादने के बाद मालिक के इशारे पर ट्रक चालक होशियारी करते हैं। वे तिरपाल से पूरी ट्रक ढंक देते हैं। इससे ट्रक पर लदा सामान दिखाई न पड़े और वे आसानी के साथ अपनी मंजिल पर पहुंच जाए। इस खेल से विभाग के सभी जिम्मेदार परिचित हैं लेकिन कोई कदम उठाने से गुरेज करते हैं।